कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का दिल्ली कूच आंदोलन हरियाणा सरकार और पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पुलिस ने बुधवार को किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। प्रदेश पुलिस के लिए बड़ी चुनौती यह कि उसे हरियाणा के साथ-साथ पंजाब से दिल्ली जाने वाले किसानों से भी जूझना पड़ रहा है।
किसानों को रोकने के लिए हरियाणा से सटे तमाम पंजाब के बॉर्डर सील किए जा चुके हैं। जबकि राष्ट्रीय राजमार्र्गों के साथ-साथ लिंक मार्र्गों पर भी पुलिस ने नाकाबंदी शुरू कर दी है। ताकि पंजाब के किसानों को हरियाणा में ही न दाखिल होने दिया जाए। इसी के चलते हरियाणा के कैथल, फरीदाबाद समेत कुछेक जिलों में स्थानीय प्रशासन ने धारा-144 भी लगाई है।
मगर इसके बावजूद बुधवार को प्रदेश पुलिस और किसान अंबाला व कुरुक्षेत्र में आमने-सामने भी हो गए। किसानों ने वहां पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकैड तोड़ दिए, जिसके बाद पुलिस को किसानों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन (पानी की तेज बौछारों) का इस्तेमाल करने पड़ा। हालांकि इस दौरान बड़ा टकराव तो टल गया।
मगर पुलिस असली अग्नि परीक्षा 26 और 27 नवंबर को होगी, जब हरियाणा और पंजाब से काफी संख्या में किसानों की जत्थेबंदियां दिल्ली रवाना होंगी। इन्हीं आंदोलनरत किसानों को संभालने के लिए जिलों में अतिरिक्त पुलिस फोर्स तैनात किया जा चुका है। सरकार के भी स्पष्ट निर्देश हैं कि किसानों को आराम से समझाया जाए और बड़े टकराव की स्थिति से टला जाए।
दबिश जारी, भूमिगत हुए किसान नेता
हरियाणा पुलिस की दबिश जारी है। पुलिस गड़बड़ी की आशंका को आधार बनाते हुए किसान नेताओं को हिरासत में ले रही है। अभी तक विभिन्न जिलों में 100 से अधिक किसानों को हिरासत में ले लिया गया है। इसे लेकर किसानों व उनके परिजनों में खासी नाराजगी है। किसानों का कहना है कि वे अपना आंदोलन शांतिपूर्वक ढंग से आगे बढ़ा रहे हैं। वे लोग हिंसा नहीं चाहते, फिर क्यों पुलिस किसान नेताओं को हिरासत में लेकर उनकी आवाज दबाना चाहती है।
आज भी टकराव की आशंका, हजारों ट्रालियों का रैला दिल्ली बढ़ेगा
वीरवार को भी इसी आंदोलन के चलते पुलिस और किसानों के बीच टकराव की आशंका बनी हुई है, क्योंकि हजारों ट्रालियों का रैला पंजाब व हरियाणा से दिल्ली की ओर बढ़ चला है। संयुक्त किसान मोर्चा के प्रवक्ता अभिमन्यु कोहाड़ ने बतया किकिसानों का दिल्ली चलो का कार्यक्रम शुरू हो गया है। इस कार्यक्रम के तहत अलग-अलग राज्यों से लाखों किसानों ने दिल्ली की तरफ कूचकर दिया है।
उन्होंने दावा करते हुए कहा कि पंजाब व हरियाणा से 20 हजार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का काफिला दिल्ली की तरफ निकल चुका है। उनके अनुसार हरियाणा सरकार ने किसानों को रोकने के लिए हरियाणा बॉर्डर को सील कर दिया है। किसानों के आंदोलन को कुचलने के लिए पुलिस अलग-अलग राज्यों में किसानों को हिरासत में ले रही है। हरियाणा में 100 से अधिक किसान प्रतिनिधियों को काबू कर लिया गया है और अन्य किसान नेताओं के घर छापेमारी की जा रही है। कोहाड़ ने कहा कि करीब1000 किसान दिल्ली पहुंच चुके हैं और वीरवार सुबह 11 बजे दिल्लीमें प्रदर्शन करेंग
किसानों के दिल्ली कूच आंदोलन से स्वास्थ्य महकमा चिंतित
उधर, किसानों के आंदोलन को लेकर सरकार और पुलिस के साथ-साथ स्वास्थ्य महकमा भी चिंतित है। इस दौरान काफी संख्या में किसान विभिन्न जगहों पर एकत्रित होकर आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में अधिकतर किसान न तो मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं और न ही कोविड नियमों का पालन कर रहे हैं। इसी बात को लेकर स्वास्थ्य महकमे की चिंताएं बढ़ी हुई हैं।
स्वास्थ्य महकमे के एक आला अफसर ने बताया कि किसानों के अत्याधिक संख्या में एकत्रित होने से संक्रमण फैलाव का खतरा भी बढ़ गया है। इसलिए किसानों से भी आह्वान किया जा रहा है कि वे अपने आंदोलन में कोविड नियमों का पालन करें, ताकि संक्रमण फैलाव की स्थिति खतरनाक स्तर तक न पहुंच जाए।