इस साल मानसून भले ही आंकड़ों में बेहतर रहा है, मगर शहरवासी झमाझम बारिश का इंतजार करते रह गए। इस बार लगातार बारिश होने की बजाय लंबे अंतराल में तेज बारिश रिकार्ड हुई है। पूरे मानसून सिर्फ अगस्त में तीन दिन तेज बारिश आई, जिसमें दो अगस्त को 133.5 मिलीमीटर, 13 अगस्त को 72 मिलीमीटर और 23 अगस्त को 80.9 मिलीमीटर बारिश शामिल है। बाकी दिनों छिटपुट बारिश होती रही है।
23 अगस्त से 20 सितंबर तक नाम मात्र की बारिश हुई है। नतीजा यह रहा कि मौसम में उमस व गर्मी चरम पर रही। लोग काफी परेशान दिखे। मौसम विशेषज्ञ का कहना है कि बंगाल की खाड़ी से निम्न दबाव उत्पन्न हुए, लेकिन उन्हें सहायता देने के लिए मौसमी व्यवस्था सक्रिय नहीं दिखी। चार दिन पहले पहले आने वाला मानसून इस बार 11 दिन से देरी गया है।
मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पश्चिमोत्तर इलाकों में मानसून की वापसी 28 सितंबर को शुरू हुई थी, जबकि सामान्य तिथि 17 सितंबर तय थी। देरी की वजह मानसून ट्रफ की सक्रियता का होना बताया जा रहा है। दरअसल, बंगाल की खाड़ी में लगातार एक के बाद एक निम्न दबाव का क्षेत्र बने, जिसकी वजह से मानसून की विदाई देरी से हुई।
इस बार मानसून सामान्य रहा है। मानसून का चलन इसी तरह से रहता है। कहीं ज्यादा तो कहीं कम। लेकिन इस बार मानसून सामान्य रहा है। इसी का असर है कि इस बार ठंड जल्द आएगी।
- सुरेंद्र पाल, निदेशक मौसम विभाग चंडीगढ़
44 सालों में सितंबर में सबसे कम बारिश
इस बार सितंबर की बारिश ने सबको तरसा दिया। बीते महीने चंडीगढ़ में सिर्फ 22 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई, जो 44 सालों में सबसे कम रही है। इससे पहले साल 1974 में 24.3 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड हुई थी।
चंडीगढ़ में मानसून ने चार दिन पहले 24 जून को दस्तक दी थी। पूरे मानसून में सिर्फ सात फीसदी की कमी रिकार्ड हुई है, जो सामान्य है। पंजाब व हरियाणा के लिए मानसून कुछ खास नहीं रहा। पंजाब में 17 फीसदी व हरियाणा में 14 फीसदी कम बारिश रिकार्ड हुई है।
पंचकूला में 65 फीसदी कम बारिश, जबकि मोहाली में 18 फीसदी
चंडीगढ़ के साथ लगते शहर पंचकूला व मोहाली में मानसून की बारिश में कमी देखी गई है। पूरे हरियाणा में सबसे कम बारिश पंचकूला में दर्ज की गई। यहां 65 फीसदी की कमी रिकार्ड हुई है। हरियाणा में सबसे ज्यादा बारिश सिरसा में 43 फीसदी, कैथल में 35 फीसदी और करनाल में 29 फीसदी ज्यादा रिकार्ड हुई।
पंजाब के होशियारपुर में 59 फीसदी कम बारिश रिकार्ड हुई है, जो पूरे सूबे में सबसे कम है। जबकि फरीदकोट में 75 फीसदी व मुक्तसर में 29 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। मोहाली में भी 18 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है।