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पंजाब में भारी बारिश से बाढ़ के हालात, गांवों-खेतों में भरा पानी और फसलें बर्बाद, रेलवे ट्रैक धंसा

Thu, 18 Jul 2019 09:33 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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गांव में घुसा बारिश का पानी - फोटो : अमर उजाला
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मानसून में भारी बारिश के चलते पंजाब भर में बाढ़ के हालात बन गए हैं। गांवों और खेतों में पानी भर गया, जिससे सामान और सारी फसलें बर्बाद हो गईं हैं। पटियाला, बठिंडा और फिरोजपुर में कई गांवों में पानी भर गया है। नाभा के गांवों में खेतों में पानी घुसने से उनकी फसलें बर्बाद हो गईं। इससे गुस्साए किसानों ने मुआवजे की मांग को लेकर नाभा-गोबिंदगढ़ रोड जाम करके धरना लगा दिया, जो रात भर जारी रहा और बुधवार को बाद दोपहर करीब ढाई बजे तक चला।
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किसानों के धरने कारण करीब चार किलोमीटर तक वाहनों की लाइनें लग गई। बड़ी गिनती में जुटे किसान इस मौके पर सरकार से खराब फसलों के लिए मुआवजे की मांग कर रहे थे। किसानों का कहना था कि उनके हलके से कैबिनेट मंत्री होने के बावजूद मानसून के लिए साइफन की सफाई नहीं की गई, जिस कारण फसलें पानी में डूब गईं। बाद में प्रशासन के भरोसे पर किसानों ने धरना समाप्त किया।

घन्नौर व पातड़ां हलकों में घग्गर दरिया में पानी के लगातार बढ़ रहे स्तर कारण आसपास के गांवों के लोगों में दहशत का माहौल है। पटियाला की बड़ी नदी में हालांकि बुधवार को पानी का स्तर कुछ कम हुआ, लेकिन लोग घरों में पानी घुसने कारण परेशान रहे। घरों में तीन फुट तक पानी भरा है। लोग अपने घरों की छतों पर बैठे पानी उतरने का इंतजार कर रहे हैं। लोगों का आरोप है कि उन तक राहत प्रबंध नहीं पहुंच रहे हैं।
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न उन्हें प्रशासन द्वारा खाना, न कोई मेडिकल सेवा और न ही पीने के पानी का प्रबंध किया गया है। वह रात भर भूखे प्यासे छतों पर बैठे रहे। चोरी होने के डर से वह अपने घरों को छोड़कर नहीं गए। गौरतलब है कि इस कालोनी के 250 परिवारों ने प्रशासन द्वारा लगाए राहत कैंप की शरण ले ली थी, जिनमें 1000 के करीब लोग हैं। उधर एसडीएम अवतार सिंह अरोड़ा ने घरों की छतों पर बैठे लोगों को राहत कैंपों में आने की अपील की है। कहा कि घरों की सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात है। लोग राहत कैंपों में आ जाएं।

घग्गर के कमजोर किनारों को मजबूत करने के आदेश

डीसी कुमार अमित ने बुधवार को पातड़ां के हलका शुतराणा में घग्गर दरिया के बहाव अधीन आते गांवों बादशाहपुर और रसौली में नाजुक जगहों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जल निकास और माल विभाग के अधिकारियों को पूरी तरह चौकस रहने के आदेश दिए। आदेश दिए कि घग्गर के कमजोर किनारों वाली जगहों को मिट्टी साथ भरे थैलों के साथ मजबूत किया जाए। ताकि घग्गर दरिया के पानी को उछलने से बचाया जाए।

डीसी ने बताया कि मारकंडा, टांगरी और घग्गर दरिया के कैचमेंट इलाके में लगातार बारिश के मद्देनजर स्थिति पर नजर रखी जा रही है। बताया कि घग्गर दरिया में पानी का स्तर सराला हेड पर 12.5 फुट है, जबकि बादशाहपुर नजदीक 23 फुट है। इसके अलावा टांगरी 14 फुट पर और मारकंडा 21.4 फुट पर बह रहे हैं। पटियाला नदी में पानी 9 फुट पर बह रहा है।

सन्नौर में 25 गांवों में खेतों में घुसा पानी, फसलें बर्बाद
सन्नौर हलके के विधायक हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने बुधवार को सन्नौर हलके के 25 गांवों का दौरा करके किसानों का हाल जाना। इन गांवों में किसानों के खेतों में बारिश का पानी घुस गया है। इससे किसानों की धान की फसलें पूरी तरह से खराब हो गई हैं। चंदूमाजरा ने सरकार से किसानों को जल्द मुआवजा देने की मांग की। प्रभावित गांवों में बोलड़कलां, महिमूदपुर, जलाहखेड़ी, उलटपुर, हसनपुर कंबोआ, मसींगन, बुधमोर शामिल हैं।

खतरे के निशान से तीन फीट नीचे बह रहा दरिया

पिछले दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण घग्गर दरिया का जलस्तर बढ़ने से घग्गर के साथलगते गांवों के किसानों व लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। इस समय घग्गर दरिया खतरेके निशान से तीन फीट नीचे बह रहा है। बुधवार को एसडीएम मूनक सूबा सिंह ने जिले के अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ घग्गर दरिया के संवेदनशील स्थानों का जायजा लिया। साथ ही घग्गर के नजदीकी करीब दो दर्जन गांवों के सरपंचों के साथ बैठक करके लोगों को पूरी चौकसी रखने को कहा।

घग्गर दरिया की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे एसडीएम सूबा सिंह ने कहा कि बाढ़ की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। उन्होंने बताया कि खनौरी गेज में पानी का स्तर खतरे के निशान से नीचे चल रहा है और बारिश के बंद होने से यह उम्मीद बढ़ गई है कि वीरवार सुबह तक पानी का बढ़ना रुक जाएगा और उसके बाद पानी का स्तर कम होना शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले चार पांच दिनों दौरान पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, मोहाली और हरियाणा के कैथल, करनाल जिलों में बारिश ज्यादा होने के कारण घग्गर में जलस्तर बढ़ गया था, अब बारिश रुकने के कारण जहां पटियाला नदी और सराला हेड में पानी का स्तर काफी कम है, वहीं टांगरी औरमारकंडा में पानी का स्तर स्थिर हो गया है।

एसडीएम सूबा सिंह ने अन्य अधिकारियों के साथ चांदू लिफ्ट योजना का जायजा लिया और मोटरें भी मौके पर मंगवाई। उन्होंने बताया कि घग्गर के साथ लगती उन जगहों की पहचान की गई थी जो कुछ कमजोर हैं और पंचायत विभाग व ड्रेनेज विभाग की ओर से उन जगहों को मजबूत किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि गांवों के सरपंचों को पंचायत फंडों में से रेत वाली खाली बोरियां, जरूरत पड़ने पर जेसीबी का प्रबंध करने और बोरियां इत्यादि को बांधने के लिए तारों की व्यवस्था करने की हिदायत पहले ही जारी कर दी गई थी। एसडीएम दफ्तर मूनक में तीस हजार थैलों का प्रबंध कर लिया गया है ताकि किसी भी चुनौती से निपटा जा सके।

कैप्टन ने बाढ़ प्रभावित जिलों में विभागों को किया सतर्क

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भारी बारिश से प्रभावित जिलों में उपायुक्तों को सतर्क रहने और आपात स्थिति से निपटने को तैयार रहने के आदेश दिए हैं ताकि लोगों और मवेशियों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जा सकें। मुख्यमंत्री ने डीसी से कहा है कि वे कड़ी चौकसी बनाए रखें और स्थिति से उत्पन्न किसी भी समस्या से निपटने के लिए तैयार रहें। मुख्यमंत्री बाढ़ के खतरे का सामना कर रहे क्षेत्रों में प्रशासनिक और अन्य विभागों के साथ लगातार संपर्क में हैं।

उन्होंने व्यक्तिगत रूप से पटियाला, बठिंडा, संगरूर और मोहाली के डीसी को इन जिलों में जमीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए बुलाया। कैप्टन ने डिप्टी कमिश्नरों को हेल्पलाइनों के साथ-साथ बाढ़ नियंत्रण कक्षों को सक्रिय करने को कहा, ताकि राज्य मुख्यालय पर विभिन्न स्तरों पर सूचनाओं का तत्काल प्रसारण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने डीसी से कहा कि आने वाले दिनों में भारी बारिश की स्थिति में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने के लिए नौकाओं की व्यवस्था सहित पानी की निकासी की योजना बनाएं।

मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव (जल संसाधन) को भी जिलों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ सुरक्षा कार्यों के तत्काल निष्पादन के लिए नहर व ड्रेनेज कर्मचारियों के साथ संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने जलभराव वाले क्षेत्रों से जल निकासी के लिए संबंधित विभाग को तत्काल टीमें तैनात करने का भी निर्देश दिया। आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार, कैप्टन अमरिंदर ने इन जिलों के सिविल सर्जनों को पानी से होने वाली बीमारियों के संभावित प्रकोप से निपटने के लिए दवाओं का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

उन्होंने इन जिलों में प्रमुख सचिव (पशुपालन) को उप-निदेशकों के साथ मिलकर दुधारू पशुओं के लिए दवाओं और चारे की अपेक्षित आपूर्ति सुनिश्चित को भी कहा। मुख्यमंत्री ने पीडब्ल्यूडी विभाग को भी निर्देश दिए कि अगर बाढ़ के कारण बुनियादी ढांचे और सड़कों व प्रतिष्ठानों को कोई क्षति पहुंचती है तो तत्काल मरम्मत का काम संभालें।

बारिश से धंसा रेलवे ट्रैक, पैसेंजर ट्रेन को रोका

तीन दिन से हो रही मूसलाधार बारिश के चलते फिरोजपुर-फाजिल्का रेल सेक्शन पर पड़ते रेलवे स्टेशन डोड से गुजरी मालगाड़ी के बाद रेल की पटरी धंस गई। मालगाड़ी सुरक्षित वहां से गुजर गई। इस पटरी से बुधवार सुबह नौ बजे के करीब पैसेंजर ट्रेन को गुजरना था। अचानक धंसी हुई रेल पटरी पर ध्यान पड़ गया। ट्रेन को पीछे ही सुरक्षित जगह पर रोक लिया गया।

डेली पैसेंजर वहीं उतर गए और अन्य वाहनों के माध्यम अपने दफ्तरों के लिए रवाना हुए। डेली पैसेंजर रोहित कुमार, रमेश कुमार व दर्शन ने बताया कि फिरोजपुर छावनी रेलवे स्टेशन से सुबह 8.40 बजे गुरुहरसहाए जाने के लिए ट्रेन पर रवाना हुए। जैसे ही नौ बजे के करीब रेलवे स्टेशन डोड के पास पहुंचे कि ट्रेन रुक गई।

उन्होंने बताया कि बारिश के कारण रेल पटरी धंस गई। ट्रैक ठीक करने में समय लगना था और ट्रेन दोपहर बारह बजे से पहले गुरुहरसहाए के लिए रवाना नहीं होनी थी। इस कारण वह लोग वहीं पर उतर गए और अन्य वाहनों पर सवार होकर अपने दफ्तरों को रवाना हुए। रमेश ने बताया कि पैसेंजर ट्रेन से पहले एक मालगाड़ी वहां से गुजरी थी उसी के बाद उक्त ट्रैक धंसा है।

गुरूहरसहाए से सुबह साढ़े आठ बजे फिरोजपुर के लिए पैसेंजर ट्रेन आनी थी वह भी ट्रैक खराब होने के कारण प्रभावित हुई है।
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हुसैनीवाला हेड से पाकिस्तान की तरफ छोड़ा पानी, गांव खतरे में

पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश होने के कारण सतलुज दरिया में जलस्तर बढ़ने लगा है। इसके चलते हुसैनीवाला हेड से पाकिस्तान की तरफ लगभग 16 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। उक्त हेड से निकलने वाली दोनों नहरें जो राजस्थान की तरफ जाती है उनमें पानी ऊपर तक भरा हुआ है। हुसैनीवाला बार्डर की तरफ कई निचले इलाकों में दरिया का पानी भर चुका है। कई किसानों की धान की फसल भी डूबी है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हुसैनीवाला हैड में पानी स्टोर करने की क्षमता बहुत है खतरे की कोई बात नहीं है।

जिन इलाकों में पानी भरा है, वह भी दरिया की जगह है, ग्रामीणों ने अवैध तरीके से बांध लगाकर वहां पर खेती की हुई है। सिंचाई विभाग समय-समय पर पानी पाक की तरफ छोड़ रहा है ताकि पीछे से पानी छोड़े जाने पर हुसैनीवाला हेड में पानी की क्षमता बनी रहे। हुसैनीवाला हेड पर तैनात एक अधिकारी ने बताया कि आदेश के मुताबिक हुसैनीवाला हेड से पाकिस्तान की तरफ पानी छोड़ देते हैं। यहां से छोड़ा गया पानी पाक के गांवों के किसानों की फसल को प्रभावित करता है या नहीं इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

इतना जरूर है कि पाक के जो गांव दरिया किनारे सटे हैं, उन्हें जरूर नुकसान होता है। चार-पांच दिनों से पाकिस्तान की तरफ पानी छोड़ा जा रहा है ताकि हुसैनीवाला हेड में हरिके पत्तन हेड से पानी छोड़ा जाए तो उसे स्टोर करने की क्षमता रहे। पहाड़ी इलाकों में बारिश होने के कारण भाखड़ा व अन्य बांधों में पानी बहुत आ चुका है वहां से पानी छोड़ा जा रहा है। इन दिनों हरिके पत्तन हेड से छोड़ा गया पानी भी पाकिस्तान के कई गांवों को प्रभावित करता हुआ हुसैनीवाला हेड में पहुंचता है।

गांव जलोके, टिंडी वाला व गट्टी राजोके के किसान दर्शन सिंह, अमरीक सिंह व सुरजीत ने बताया कि पांच महीनों में हुसैनीवाला हेड सूखा होने के कारण पीछे से छोड़े गए पानी से सरहदी गांवों को नुकसान नहीं पहुंचा है। यदि हुसैनीवाला हेड में पहले से ही पानी भरा होता तो दरिया पार गांवों के खेतों व घरों में पानी घुस जाना था। 
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