चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों के आधा सत्र बीत जाने के बावजूद बच्चों के खाते में अभी तक स्कूल ड्रेस और नोटबुक के पैसे नहीं आए हैं। ये पैसे मार्च के अंत तक खाते में डाल दिए जाते हैं, लेकिन आठ महीने से ज्यादा का समय बीत गया है, शिक्षा विभाग को इसकी सुध नहीं है।
सरकारी स्कूलों में एंट्री कक्षा से आठवीं कक्षा तक किताबें स्कूल की तरफ से दी जाती है। इसके अलावा स्कूल ड्रेस और नोटबुक्स की राशि बच्चों के अकाउंट में सरकार की ओर से ट्रांसफर की जाती है। इसमें राज्य सरकार की ओर से पिछले माह बच्चों के अकाउंट में राशि भेज दी गई है, लेकिन केंद्र के सर्व शिक्षा की तरफ से अभी भी राशि का बच्चों को इंतजार है। इसके कारण 90 हजार छात्र प्रभावित हैं।
शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार स्कूलों में बच्चों को किताबें मार्च के अंत में ही वितरित कर दी गई थी, लेकिन नोटबुक्स और स्कूल ड्रेस बच्चों को अपने खर्च पर ही लेनी पड़ी। राज्य सरकार की ओर से 90 हजार में से 80 हजार बच्चों के खाते में स्कूल ड्रेस और नोटबुक्स की राशि ट्रांसफर कर दी गई है। कुछ बच्चों के अकाउंट में टैक्नीकल खराबी के कारण राशि ट्रांसफर नहीं हो पाई, इस पर काम किया जा रहा है और आगामी 15 दिनों में राशि भेज दी जाएगी।
सरकारी स्कूल के शिक्षक ने बताया कि हर साल सरकार की तरफ से बच्चों के खाते में पैसे ट्रांसफर होने थोड़ी देरी हो जाती है, लेकिन इस बार काफी समय बीत गया है। इसके लिए बच्चे का आधार लिंक वाला अकाउंट नंबर ही मान्य होता है। स्कूलों ने स्कूल ड्रेस और नोटबुक्स के लिए बच्चों के ऑनलाइन फॉर्म मार्च में ही भर दिए थे। पिछले माह के अंत में राज्य सरकार की ओर से बच्चों के अकाउंट में स्कूल ड्रेस के 606 रुपये ट्रांसफर हो गए हैं, लेकिन सर्व शिक्षा का अभी भी इंतजार है।
ये रहता है स्कूल ड्रेस और नोटबुक्स का बजट
प्राइमरी सेक्शन
कुल राशि : 1206 रुपये
राज्य शेयर : 606 रुपये
समग्र शिक्षा : 600 रुपये
अपर प्राइमरी सेक्शन
कुल राशि : 1422 रुपये
राज्य शेयर : 822 रुपये
समग्र शिक्षा : 600 रुपये
राज्य की तरफ से राशि हुई ट्रांसफर, केंद्र के पोर्टल में आई खराबी
राज्य सरकार की ओर से स्कूल ड्रेस के रुपये बच्चों के अकाउंट में ट्रांसफर करवाए जा चुके हैं। केंद्र सरकार के ऑनलाइन पोर्टल में दिक्कत आ गई थी। इस कारण पोर्टल फंक्शन नहीं कर पाया, इसलिए समग्र शिक्षा के बजट देरी हुई है। इसे भी जल्द ट्रांसफर करवा दिया जाएगा।
- हरसुहिंदर पाल सिंह बराड़, शिक्षा निदेशक
आधा सत्र बीतने के बाद भी बच्चों को स्कूल ड्रेस का इंतजार चिंताजनक
अधिकारियों के सत्र के शुरुआती समय में अपने बच्चों की स्कूल ड्रेस और किताबें खरीदते समय ही सोचना चाहिए कि हमारे ऊपर अन्य बच्चों की भी जिम्मेदारी है, जिन्हें स्कूल ड्रेस और नोट बुक्स की जरूरत है। आधे से अधिक सत्र बीतने के बाद भी ड्रेस और नोट बुक्स का पूरा बजट नहीं आना अधिकारियों की संवेदनहीनता दिखाता है। प्रशासक को अपने स्तर पर इसकी रिपोर्ट तलब करनी चाहिए और प्रक्रिया जल्द पूरी करवानी चाहिए।
- नितिन गोयल, अध्यक्ष, अभिभावक संघ