हॉकी के खेल में रफ्तार और बॉल को ड्रिवलिंग करते हुए गोल में तबदील करने के लिए जाने वाले महान हॉकी प्लेयर मोहम्मद शाहिद हमारे बीच नहीं रहे। 1980 में भारत को ओलंपिक में गोल्ड जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शाहिद को अर्जुन अवार्ड और पद्मश्री अवार्ड से नवाजा गया था। सिटी के कई हॉकी खिलाड़ी उनके साथ खेल चुके हैं और उनके निधन से उन्हें बड़ा झटका लगा है।
तेज रफ्तार के धनी थे तीन बार ओलंपिक खेल चुके बलबीर सिंह सीनियर ने कहा कि शाहिद के निधन की खबर सुनकर काफी दुख हुआ। बलबीर के अनुसार मोहम्मद शाहिद भारत के उन
खिलाड़ियों मे से एक थे, जिन्होने हॉकी में भारत का नाम विश्व में रोशन किया। वह बहुत की क्षमतावान खिलाड़ी थे। वह फील्ड में जितनी बेहतर ड्रिवलिंग करते थे, उतना ही तेज रफ्तार के लिए भी जाने जाते थे।
सदियों में पैदा होते हैं ऐसे खिलाड़ी
1980 में ओलंपिक, 1981 में वर्ल्ड कप और एशियन चैंपियनशिप में मोहम्मद शाहिद के साथ खेल चुके ओलंपियन राजिंदर सिंह सीनियर ने कहा वह लीजेंड प्लेयर थे। उनका स्टाइल की सबसे जुदा था। बहुत कम खिलाड़ी ऐसे होते हैं, जिनके पास ऐसी कला होती है। वह एशिया के बेस्ट खिलाड़ियों मे से एक थे।
नाम सुना, मिले नहीं, लेकिन उनके जैसा बनने की तमन्ना
भारत के पूर्व कप्तान राजपाल सिंह ने कहा कि जबसे मैंने हॉकी खेलना शुरू किया है। शाहिद के बारे में बहुत सुना था कि वह अपनी अलग ही शैली के लिए पूरे विश्व में जाने जाते थे। उनसे टिप्स लेने की इच्छा होती थी, लेकिन कभी मिलने का मौका नहीं मिला। उनके अनुसार मोहम्मद शाहिद को अपने खेल के लिए हमेशा याद रखा जाएगा।