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Chandigarh News: मोहाली की प्रॉपर्टी को मिल रहा बूम, चंडीगढ़ की कॉमर्शियल संपत्तियों में निवेश न के बराबर

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चंडीगढ़। चंडीगढ़ की कॉमर्शियल प्रॉपर्टी का बाजार पड़ोसी मोहाली के आगे फीका पड़ता जा रहा है। एक तरफ मोहाली में फ्री होल्ड कॉमर्शियल साइटों के लिए निवेशक जमकर पैसा लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चंडीगढ़ में 99 साल की लीज वाली कॉमर्शियल संपत्तियों की ई-नीलामी को खरीदारों की अपेक्षित दिलचस्पी नहीं मिल रही। निवेशक अब मोहाली के साथ पंचकूला और जीरकपुर का रुख कर रहे हैं। प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स एसोसिएशन चंडीगढ़ का कहना है कि चंडीगढ़ प्रशासन यदि कॉमर्शियल संपत्तियों को लीज होल्ड से फ्री होल्ड करता है तो निवेश का यह रुख पलट सकता है और शहर के प्रॉपर्टी बाजार को बड़ा फायदा मिल सकता है। चंडीगढ़ में कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल संपत्तियां फिलहाल लीज होल्ड व्यवस्था में हैं।
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मोहाली में फ्री होल्ड कॉमर्शियल साइटों को मिले बेहतर रिस्पॉन्स ने इस अंतर को और उजागर कर दिया है। एसोसिएशन के अनुसार गमाडा की कॉमर्शियल फ्री होल्ड साइटों की बिक्री से 5,391.49 करोड़ रुपये का राजस्व मिला जो निर्धारित रिजर्व प्राइस से करीब 40 फीसदी अधिक बताया गया है। एसोसिएशन का तर्क है कि यह आंकड़ा बताता है कि निवेशक फ्री होल्ड संपत्तियों में पैसा लगाने को ज्यादा सुरक्षित और आकर्षक मान रहे हैं।
चंडीगढ़ में लीज, इसलिए निवेशक पड़ोसी शहरों में
प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रम चोपड़ा और महासचिव जितेंद्र सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ में कॉमर्शियल संपत्ति लीज होल्ड होने के कारण खरीदारों और निवेशकों को कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि मोहाली, पंचकूला और जीरकपुर में फ्री होल्ड विकल्प उपलब्ध होने से निवेशक इन शहरों को प्राथमिकता दे रहे हैं। बड़े उद्योगपति और कारोबारी भी अब पड़ोसी शहरों में उपलब्ध कॉमर्शियल प्रॉपर्टी को विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।
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एसोसिएशन ने शनिवार को पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को पत्र भेजकर कॉमर्शियल लीज होल्ड संपत्तियों को फ्री होल्ड करने की मांग दोहराई है। एसोसिएशन का कहना है कि चंडीगढ़ देश के प्रमुख नियोजित शहरों में है और यहां कॉमर्शियल प्रॉपर्टी की मांग स्वाभाविक रूप से मजबूत है, लेकिन लीज होल्ड व्यवस्था निवेश की राह में बड़ी बाधा बन रही है।
प्रशासन को भी हो सकता है बड़ा राजस्व लाभ
एसोसिएशन का कहना है कि जिस निवेश से चंडीगढ़ प्रशासन को राजस्व मिल सकता है, उसका बड़ा हिस्सा फिलहाल पड़ोसी शहरों की ओर जा रहा है। यदि चंडीगढ़ की कॉमर्शियल संपत्तियों को फ्री होल्ड किया जाता है तो खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा, संपत्तियों का मूल्य और लेनदेन बढ़ेगा तथा प्रशासन को भी अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। मोहाली में फ्री होल्ड साइटों की सफलता ने चंडीगढ़ के प्रॉपर्टी बाजार में यह सवाल और बड़ा कर दिया है कि जब निवेशक फ्री होल्ड को प्राथमिकता दे रहे हैं तो चंडीगढ़ की कॉमर्शियल संपत्तियों को कब तक लीज होल्ड व्यवस्था में रखा जाएगा।
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