प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पांच सौ और एक हजार के नोट बंद करने के एलान ने छोटे व मध्यम वर्ग को सकते में डाल दिया है। मंडियों में फसल की अदायगी का इंतजार कर रहे किसानों की पेमेंट रुक गई है। उधर, बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरी कलां ने कहा कि बुधवार को धान की अदायगी बिल्कुल बंद हो गई। इतना ही नहीं, आढ़तियों ने किसानों से साफ कह दिया है कि फिलहाल कुछ दिन पेमेंट की उम्मीद भी नहीं है। क्योंकि दो दिन बैंक बंद हैं। उसके बाद भी एक हफ्ते में सिर्फ बीस हजार रुपये ही निकाले जा सकते हैं।
बीस हजार से कितने किसानों की पेमेंट हो सकती है। ऐसे में जब तक केंद्र सरकार लिमिट नहीं बढ़ाती, किसानों को अदायगी संभव ही नहीं है। उन्होंने कहा कि इस फैसले का सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को पहुंचा है। एक-दो दिन में सभी किसान व खेत मजदूर जत्थेबंदियों की बैठक बुला कर इस गंभीर मामले पर रणनीति तय की जाएगी।
व्यापारियों को फिलहाल बाजार में मंदी की आशंका
छोटे किसान और कारोबारी सकते में
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वहीं, भाकियू के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि पहले तो धान की फसल उ मीद से कहीं ज्यादा हो गई। जिसके लिए कैश क्रेडिट लिमिट का प्रस्ताव भी राज्य सरकार ने नहीं भेजा था, क्योंकि किसी को इतने उत्पादन की उम्मीद नहीं थी। उसके चलते पेमेंट रुकी रही।
अब नोट बंद होने से समस्या आ गई। पंजाब व्यापार मंडल के महासचिव महिंदर अग्रवाल ने कहा कि बाजार में कारोबार दस फीसदी रह गया है। केंद्र सरकार के फैसले का छोटे और मध्यम कारोबारियों पर सबसे बुरा प्रभाव पड़ा है। यहां तक कि राशन वालों की दुकान पर भी ग्राहक नहीं है। एटीएम शुरू होने के बाद स्थिति कुछ साफ होगी। लेकिन आशंका यही है कि जब तक बैंक विदड्रॉल की लिमिट नहीं बढ़ती कारोबार प्रभावित ही रहेगा।
इसे पटरी पर आने में दो-तीन माह भी लग सकते हैं। इस फैसले से काले धन की पैरलल इकोनॉमी तो खत्म होगी, पर साथ में घरेलू इकोनॉमी भी खत्म हो गई। बहुत से लोगों ने बेटियों की शादी के लिए पैसे जोड़े थे, वे बर्बाद हो गए।