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मोदी-शाह के खिलाफ बादल का ऐलान-ए-जंग

Tue, 23 Sep 2014 02:01 PM IST
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब में सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन किया है। इसके तहत अकाली दल हरियाणा की दो सीटों से अपने उम्मीदवार खड़े करेगा।
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वहीं, पंजाब के सीएम प्रकाश सिंह बादल और डिप्टी सीएम सुखबीर बादल इनेलो के स्टार प्रचारक होंगे। सियासी हलकों में इस गठबंधन को बे-मेल रिश्ता बताया जा रहा है। क्योंकि दोनों राज्यों के बीच कई अहम मुद्दों पर दोनों ही पार्टियों का स्टैंड एक-दूसरे से उलट और अपने-अपने राज्यों के हक में है।

पंजाब और हरियाणा के बीच शुरू से ही विवाद का सबसे प्रमुख मुद्दा चंडीगढ़ रहा है। दोनों ही राज्य चंडीगढ़ पर अपना-अपना हक जताते आ रहे हैं। कोई भी दावा छोड़ने को तैयार नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि सत्ता में कोई भी पार्टी हो, चंडीगढ़ का दावा हमेशा बरकरार रहा।
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न्यू चंडीगढ़ नाम पर भ्‍ाड़के थे हुड्डा

पिछले दिनों पंजाब के डिप्टी सीएम ने मोहाली जिले के मुल्लांपुर को जब न्यू चंडीगढ़ का नाम दिया तो विवाद फिर मुखर हो गया। हरियाणा के सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस पर ऐतराज जताते हुए कहा कि चंडीगढ़ ब्रांड-नेम का इस्तेमाल पंजाब ऐसे नहीं कर सकता। अकाली दल और इनेलो दोनों का ही चंडीगढ़ के मुद्दे पर यही स्टैंड है।

दोनों ही चंडीगढ़ पर अपने-अपने राज्य का दावा जताते आए हैं। दोनों सूबों के बीच विवाद का दूसरा मुद्दा पानी है। हरियाणा, सतलुज-ब्यास नदियों का पानी मांग रही है। पर पंजाब की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2004 में विधानसभा में बिल पास करके पुराने सारे समझौते रद्द कर हरियाणा की उम्मीदों पर पानी फेर दिया था।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, लेकिन दोनों ही राज्यों की सभी पार्टियां इस मुद्दे पर अपने-अपने राज्य के हक में हैं। जब कांग्रेस ने 2004 में नया बिल पास किया था तो हरियाणा में भी कांग्रेस सरकार थी, जिसने विरोध किया था, जबकि पंजाब की विरोधी पार्टियों ने भी इसका समर्थन किया था।

चंडीगढ़ का मुद्दा अहम

राजीव गांधी और हरचंद सिंह लौंगोवाल के बीच हुए समझौते में भी चंडीगढ़ का मुद्दा था। फैसले के मुताबिक चंडीगढ़ पंजाब को दिया जाना था। बदले में पंजाब ने हिंदी भाषी गांव हरियाणा को देने थे।

इसके लिए ईएस वेंकटरमैया की अगुवाई में आयोग गठित हुआ, जिसने पंजाब का 70 हजार एकड़ एरिया हरियाणा को देने की सिफारिश की थी, लेकिन असहमति के कारण यह सिरे नहीं चढ़ सका।

जुलाई-1986 में केंद्र सरकार ने ट्रांसफर अनिश्चितकाल के लिए रद्द कर दिया। राज्यों के विभाजन के बाद दोनों ने ही सचिवालय भी बांट लिया। दोनों ने अपने मिनी सचिवालय भी बना लिए। हरियाणा ने पंचकूला और पंजाब ने मोहाली को सैटेलाइट टाउन और राजधानी के रूप में विकसित भी किया। पर चंडीगढ़ पर दावा नहीं छोड़ा।

हरियाणा ने मुल्लांपुर को न्यू चंडीगढ़ नाम दिए जाने पर भी सख्त ऐतराज जताया था। सीएम भूपेंद्र हुड्डा का कहना था कि चंडीगढ़ पर पंजाब का हक नहीं है क्योंकि जिस जगह पर यह बसाया गया, वह अंबाला जिले का हिस्सा थी।

उधर, डिप्टी सीएम सुखबीर बादल का कहना था कि राजीव-लौंगोवाल समझौते के मुताबिक चंडीगढ़ पंजाब का हिस्सा है। नई दिल्ली और नवी मुंबई विकसित हो सकते हैं तो न्यू चंडीगढ़ क्यों नहीं।

पानी का मुद्दा भी बहुत खास

पंजाब की नदियों के पानी को लेकर दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। यह मुद्दा भी राजीव-लौंगोवाल समझौते में था। इसके तहत इराडी ट्रिब्यूनल ने दोनों राज्यों की हिस्सेदारी भी तय की थी।

पर विवाद खत्म नहीं हुआ, मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। हरियाणा का कहना है कि वह भाखड़ा मेन लाइन से अपने हिस्से का पानी मांग रहा है।

पंजाब का तर्क है कि सिंचाई की जरूरतें कई गुना बढ़ने के कारण उसके पास हरियाणा को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है। मामला काफी साल से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

इसी दौरान वर्ष 2004 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विधानसभा में बिल पेश कर पुराने सारे समझौते रद्द कर हरियाणा की उम्मीदों पर पानी फेर दिया था। तब हरियाणा में भी कांग्रेस सत्तासीन थी, जिसने इसका जबरदस्त विरोध किया था, मामला हाईकमान तक भी गया था।

गहरा पारिवारिक रिश्ता है दोनों परिवारों का

पंजाब के बादल परिवार और हरियाणा के चौटाला परिवारों के बीच रिश्ता महज सियासी नहीं, बल्कि दोनों में गहरी पारिवारिक सांझ है। पंजाब के बादल गांव और हरियाणा के चौटाला गांव के बीच एक सरहद और 47 किलोमीटर का फासला है।

दोनों गांवों में कहा जाता है कि दोनों परिवार कभी अलग नहीं हो सकते। चौधरी देवीलाल के जमाने से दोनों परिवारों का ऐसा रिश्ता बना, जो नई पीढ़ियों के साथ गहरा होता गया।

सीएम प्रकाश सिंह बादल चौधरी देवीलाल का बहुत सम्मान करते थे। तो ओमप्रकाश चौटाला, बादल को अपना बड़ा भाई मानते हैं। अगली पीढ़ी में भी ऐसे ही रिश्ते हैं। बादल की बेटी परनीत कौर का कन्यादान देवीलाल ने किया था, तब बादल जेल में थे।

चौटाला को सजा सुनाई गई तो बादल परिवार उनके साथ खड़ा था। 2002 में जब बादल परिवार पर मामला दर्ज हुआ तो चौटाला परिवार ने उनकी मदद की थी। दोनों ने ही अपने गांवों में विकास की गंगा बहाई है।
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ये कहना है मंत्रियों और नेताओं का

चंडीगढ़ और नदी जल बंटवारे पर शिरोमणि अकाली दल का स्टैंड बिल्कुल स्पष्ट है। चंडीगढ़ पंजाब का है और किसी दूसरे राज्य को देने के लिए पंजाब के पास एक बूंद भी अतिरिक्त पानी नहीं है। जहां तक हरियाणा में इनेलो के साथ गठबंधन का सवाल है, सरकार बनने पर इन मसलों का हल सहमति से निकाल लिया जाएगा, लेकिन पंजाब के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।
- डॉ. दलजीत सिंह चीमा, प्रवक्ता, शिअद

हमारी पार्टी का स्टैंड शुरू से ही साफ है। चंडीगढ़ हमारा है और हम लेकर रहेंगे। पानी के मुद्दे पर भी सुप्रीम कोर्ट ने एसवाईएल दे दिया है। केंद्र सरकार को चाहिए कि वह नहर बनाकर दे। गठबंधन अपनी जगह है पर कुछ मुद्दे राज्यों के होते हैं। जब पंजाब ने पानी के मामले में पुराने समझौते रद्द किए थे, तो हरियाणा में भी कांग्रेस ही थी, जिसने विरोध किया था, लेकिन पंजाब की भाजपा ने कांग्रेस का साथ दिया था।
- अशोक अरोड़ा, हरियाणा प्रदेश प्रधान, इनेलो

शिअद-इनेलो गठबंधन सियासी विकृति
शिअद-इनेलो गठबंधन सियासी विकृति है। पंजाब में भाजपा के साथ साझेदारी और हरियाणा में इनेलो से गठबंधन नैतिकता की कमी प्रदर्शित करता है। देश की सियासत में शायद ही ऐसी कोई मिसाल हो। बादलों को प्रचार शुरू करने से पहले हरियाणा के साथ विवादित मुद्दों चंडीगढ़ और पानी पर अपना स्टैंड स्पष्ट करना चाहिए। क्योंकि इन पर इनेलो और शिअद बिल्कुल विरोधी स्टैंड रखते हैं।
- कैप्टन अमरिंदर सिंह, लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता

शिअद और इनेलो को चाहिए कि गठबंधन से पहले चंडीगढ़ और पानी के मुद्दे पर अपना स्टैंड साफ करें। खुद को हरियाणा की हितैषी होने का दावा करने वाली पार्टी, ऐसी पार्टी से कैसे समझौता कर सकती है, जो राज्य के हितों की विरोधी है। अगर इनकी सरकार बनती है तो दोनों ही अपने राज्यों की जनता को धोखा देंगी।
- अनिल विज, नेता विधायक दल, भाजपा, हरियाणा
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