चंडीगढ़ में जल्द ही आदर्श किराएदारी अधिनियम 2020 (एमटीए) को लागू कर दिया जाएगा। यूटी प्रशासन ने इस अधिनियम की अधिसूचना का प्रारूप जारी कर शहरवासियों से 31 अक्तूबर तक सुझाव मांगा है। चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा की तरफ से इस संबंध में एक सार्वजनिक सूचना जारी की गई है और लोगों द्वारा इस अधिनियम को लेकर अपने सुझाव देने का आग्रह किया गया है।
इस नए अधिनियम के अनुसार मकान मालिकों और किराएदारों के बीच एक लिखित अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिसमें किराए से लेकर हर बड़ी से छोटी जिम्मेदारी तय की जाएगी। यहां तक कि यह भी साफ रहेगा कि मकान की पुताई कौन करवाएगा। इसके अलावा नल की टोटी से लेकर वॉश बेसिन और पंखे या खराब स्विच कौन बदलवाएगा, इसको लेकर भी अधिनियम में जिम्मेदारी तय की गई है।
इस अधिनियम को लेकर शहर का कोई भी नागरिक सेक्टर-9 स्थित यूटी सचिवालय के चौथे तल पर स्थित कमरा नंबर-418 (सुपरिंटेंडेंट एस्टेट-2) में जाकर अपने सुझाव को जमा करा सकता है। कानून लागू होने के बाद मकान मालिक और किराएदार के बीच किसी भी तरह कोई समस्या की सुनवाई किराया प्राधिकरण और किराया न्यायालय में की जाएगी। जानकारी के अनुसार, किराया न्यायालय में सदस्य पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के परामर्श के बाद रखे जाएंगे।
राज्य उच्च न्यायिक सेवा के सदस्यों को ही किराया न्यायालय का पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया जा सकता है। इसके अलावा प्रशासक शहर के जरूरत के अनुसार किराया न्यायाधिकरण का गठन कर सकते हैं।
किराएदारों के हितों की भी रक्षा होगी
इस अधिनियम से मकान मालिकों के साथ किराएदारों के भी हितों की भी रक्षा होगी। नए कानून से उम्मीद है कि मकान मालिक अपने खाली फ्लैट या मकान किराए पर देने से नहीं डरेंगे। मकान मालिक को किराए के परिसर में मरम्मत कार्य कराने या पुरानी चीजों को बदलने के लिए किराएदार को 24 घंटे पूर्व सूचित करना होगा तभी वह प्रवेश कर सकेंगे। प्रस्तावित कानून के मुताबिक, किराएदार से विवाद होने की स्थिति में मकान मालिक बिजली-पानी की आपूर्ति नहीं काट सकता है।
प्रशासन की तरफ से जारी अधिसूचना के प्रारूप के अनुसार देश में शहरी आबादी का अनुपात 2001 के 27.82 प्रतिशत से 2011 में बढ़कर 31.16 प्रतिशत हो गया है और 2050 में शहरी आबादी 50 प्रतिशत से भी ज्यादा होने का अनुमान है। इस बढ़ती हुई शहरी आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा शिक्षा, रोजगार, व्यापार, स्वास्थ्य सेवाओं तथा बेहतर जीवनयापन के लिए शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन कर रहा है।
मकान खाली नहीं करा सकता मालिक
नए अधिनियम के अनुसार, किराया अनुबंध में लिखी अवधि से पहले किराएदार को तब तक नहीं निकाला जा सकता, जब तक उसने लगातार कई महीनों तक किराया न दिया हो या वह संपत्ति का दुरुपयोग कर रहा हो। अगर किराया अनुबंध खत्म होने के बाद भी वह मकान खाली नहीं कर रहा है तो मकान मालिक को दोगुना मासिक किराया मांगने का अधिकार है। प्रारूप के मुताबिक किराए का तीन गुना सुरक्षा राशि लेना तब तक गैर-कानूनी होगा, जब तक इसका अनुबंध न बनवाया गया हो। किराएदार के घर खाली करने पर मकान मालिक को एक महीने के भीतर यह रकम लौटानी होगी।
...तभी कमान मालिक बढ़ा सकता है किराया
आदर्श किरायेदारी अधिनियम 2020 के लागू होने के बाद परस्पर सहमत शर्तों के आधार पर लिखित रूप से करार के बिना कोई परिसर किराए पर नहीं दिया जा सकेगा। यह रिहायशी और व्यावसायिक किराएदारों पर लागू होगा। प्रारूप में कहा गया है कि भवन के ढांचे की देखभाल के लिए किराएदार और मकान मालिक दोनों ही जिम्मेदार होंगे। अगर मकान मालिक ढांचे में कुछ सुधार कराता है तो उसे मरम्मत का काम खत्म होने के एक महीने बाद किराया बढ़ाने की इजाजत होगी।
हालांकि, इसके लिए किराएदार की सलाह भी ली जाएगी। दूसरी ओर, किराया अनुबंध लागू होने के बाद अगर भवन का ढांचा खराब हो रहा है और मकान मालिक मरम्मत कराने की स्थिति में नहीं है तो किराएदार किराया कम करने को कह सकता है। किसी भी झगड़े की स्थिति में किराएदार किराया प्राधिकरण से संपर्क कर सकता है।