प्रधानमंत्री मोदी की दिग्गज मंत्री हरसिमरत कौर बादल द्वारा गोद लिए गांव की गाउंड रिपोर्ट देखिए, वादों का असली सच पता चल जाएगा। सांसद और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल का गोद लिया गांव मान केंद्र विकास की बुलंदियों को छूने के बजाय वादों में फंस कर रह गया है। भाजपा से अकालियों की पुरानी दोस्ती की वजह से गांव में स्किल डेवलपमेंट सेंटर तो बन गया है, लेकिन सियाची पेच के चलते करीब एक साल से इस पर ताला लटक रहा है।
स्किल डेवलपमेंट सेंटर को लेकर गांव वालों को केवल इतना ही पता है कि अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि इसमें कौन से कोर्स शुरू किए जाएं। जबकि हकीकत में इसे अभी तक केंद्र सरकार से मंजूरी नहीं मिल पाई है। गांव मान का सीनियर सेकेंडरी स्कूल देखने में किसी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं, लेकिन यहां भी शिक्षा के नाम पर कोरा मजाक हो रहा है।
स्कूल में स्टाफ न होने के कारण विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। स्कूल के ड्राइंग टीचर द्रोणाचार्य बन बच्चों को टारगेट पर निशाना लगाना सिखाते हैं। ऐसे में यहां तैयार हो रहे ‘अर्जुन’ आगे चलकर खेलों में क्या नाम रोशन करेंगे, इसका महज अंदाजा ही लगाया जा सकता है।
बठिंडा गांव
यह है जमीनी हकीकत
इस योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों का सर्वांगीण विकास करना है। लेकिन यह काम नहीं हो पा रहा है। इस योजना के तहत गांव में बुनियादी विकास, सामाजिक विकास व सांस्कृतिक विकास पर फोकस किया जाना है, जबकि यह काम गांव वाले खुद कर रहे हैं। योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को सामाजिक अभिप्रेरित करना और विलेज कम्युनिटी की सामाजिक लामबंदी करना है। साथ ही योजना में गांवों को पूरी तरह से बुनियादी सुविधाओं से लैस किया जाना है। लेकिन इसके लिए पैसा और समय चाहिए। इन गांवों को ‘मॉडल ऑफ लोकल डेवलपमेंट’ के रूप में स्थापित करना है, जो दूसरे गांवों के लिए मिसाल बने, लेकिन इसके लिए दो साल का समय कम है। इन गांवों के विकास के लिए सभी राजनीतिक दलों को राजनीति से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पा रहा।
बठिंडा गांव
ढोल के अंदर पोल
गांव मान के सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 200 बच्चे हैं। लेकिन पढ़ाई का हाल यह है कि सामाजिक शिक्षा का टीचर अंग्रेजी पढ़ा रहा है। लाइब्रेरी का चार्ज भी किसी अन्य टीचर के पास है। ऐसे में लाइब्रेरी के अंदर धूल जमी हुई है और किताबें कद्रदानों को तरस गई हैं।
शिक्षकों के आठ पद, पांच खाली
स्कूल में शिक्षकों के आठ पद स्वीकृत हैं। जिसमें से पांच खाली हैं। विज्ञान शिक्षक के दो पद खाली हैं। विज्ञान विषय कोई दूसरा शिक्षक पढ़ा नहीं सकता, इसलिए स्टूडेंट्स को खुद ही विज्ञान की पढ़ाई करनी पड़ रही है। फिजिकल एजुकेशन का दूर-दूर तक लेना देना नहीं है।
गांव की मुख्य जरूरतें
गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। मेडिकल स्टोर के सहारे पूरे गांव का इलाज हो रहा है। मेडिकल स्टोर खुलने से पहले ही मरीज दवा के लिए लाइन लगाते हैं। दवा विक्रेता बीमारी का नाम सुनकर दवा दे देता है। प्रसव के लिए लंबी या बादल गांव जाना पड़ता है।जो काम हो रहे हैं
सांसद ने यहां पंचायत घर बनवाया है। जिम के लिए कमरा बन कर तैयार है। गांव की गलियां बन गई हैं, कुछ काम ठेकेदार ने छोड़ दिया है। कमेटी हाल बनवा दिया गया है। आरओ प्लांट भी लग गया है।
स्कूल में स्टाफ राज्य सरकार को देना है। मैंने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी है। जहां तक स्किल डेवलपमेंट सेंटर का सवाल है, राज्य सरकार लिख कर दे, हम केंद्र से फटाफट चालू करवा देंगे।
- हरसिमरत कौर बादल, सांसद बठिंडा
इस गांव में जो काम रूरल डेवलपमेंट फंड और पंजाब इंस्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड के फंड से करवाए जा रहे थे, उन्हें फिलहाल किसी वेरिफिकेशन के लिए रोका हुआ है। स्किल डेवलपमेंट सेंटर तैयार है, उसके लिए केंद्र सरकार से एनओसी मिलना बाकी है, इसलिए वो भी अभी बंद है।
- दीप्रवा लाकरा, डीसी बठिंडा