इस पर बिजली निगम ने सर्विस टैक्स चोरी और ईपीएफ आई ईएसआई चोरी की शिकायत कर दी। भिवानी सहित 11 जिलों में एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें केवल अजय को आरोपी बना दिया गया। जबकि सुरजेवाला व अन्य के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। अजय ने बताया कि उसे करीब 3 करोड़ रुपये का देनदार सभी ने बना दिया।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से की शिकायत, शुरू हुई विजिलेंस जांच
शिकायतकर्ता ने विज को बताया कि जब उसने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को शिकायत दी तो उन्होंने विजिलेंस से जांच शुरू करवा दी लेकिन विजिलेंस भी एकतरफा कार्रवाई कर रही है और आज तक सुरजेवाला को बयान के लिए तलब नहीं किया गया। शिकायतकर्ता ने विज से इस मामले में एसआईटी गठित कर जांच की गुहार लगाई।
न चीफ इलेक्ट्रिशियन का सर्टिफिकेट न अनुभव
शिकायतकर्ता अजय ने बताया कि ठेका लेने के लिए निर्धारित शर्त यह थी कि कंपनी के पास दो साल का अनुभव हो। जिसने सरकारी विभागों में इस तरह की पहले सेवाएं दी हों। दूसरा चीफ इलेक्ट्रीशियन का सर्टिफिकेट होना अनिवार्य था। लेकिन उसके पास ऐसा कुछ नहीं था फिर भी टेंडर दिलाया दिए गए थे।
शिकायतकर्ता ने आरटीआई की सूचना और शिकायत मुझे दी है। इस मामले में डीजीपी को एक नई एसआईटी गठित करने के आदेश दिए गए हैं। यह भी कहा गया है कि सुरजेवाला को बुलाकर उनसे भी पूछताछ की जाए। जिन्होंने इस मामले में कोताही बरती है, उनके खिलाफ भी निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी। किसी को बख्शा नहीं जाएगा चाहे वो कोई भी हो। अनिल विज, गृहमंत्री।