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हरियाणाः खतरे में 30 लाख छात्रों का भविष्य, डेढ़ लाख टीचर होंगे बेरोजगार, एक आदेश बना वजह

Mon, 08 Apr 2019 02:00 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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हरियाणा में 30 लाख छात्रों का भविष्य खतरे में हैं। करीब डेढ़ लाख टीचर बेरोजगार होंगे और इसकी वजह है हाईकोर्ट का एक आदेश, जिसका फायदा उठाया जा रहा है। हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग हाईकोर्ट के आदेशों की आड़ में गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर बड़ी कार्रवाई करने जा रहा है। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को 1050 से अधिक गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को बंद करने के आदेश दिए हैं, मगर विभाग करीब 10 हजार छोटे-बड़े गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को बंद करने की तैयारी कर चुका है।
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विभाग ने अगर अपनी योजना अनुसार, इन स्कूलों पर तालाबंदी की तो 30 लाख छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा और डेढ़ लाख शिक्षक और अन्य स्टाफ बेरोजगार होगा। विभाग के मनमाने रवैये का हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ कड़ा विरोध कर रहा है। संचालकों ने स्कूलों को बंद करने से पहले तीस लाख छात्रों का दूसरे स्कूलों में दाखिला और बेरोजगार होने वाले शिक्षकों-स्टाफ के लिए रोजगार का प्रबंध करने की मांग उठाई है।

संघ के प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने कहा कि विभाग ने अगर दस हजार गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को बंद किया तो बड़े आंदोलन का सामना करना पड़ेगा। स्कूल संचालकों में बेहद रोष है। सरकार को अपने घोषणा पत्र के अनुसार, नियमों का सरलीकरण कर इन स्कूलों को मान्यता देनी चाहिए।
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स्कूल बसों पर लगाया टैक्स लें वापस

प्राइवेट स्कूल संघ ने निजी स्कूलों की बसों पर तीन हजार से लेकर 11 हजार रुपये तक लगाए गए टैक्स को भी वापस लेने की मांग की है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने कहा कि निजी स्कूल इतने घाटे में चल रहे हैं कि टीचर्स की सैलरी व बच्चों के लिए अन्य सुविधाएं जुटाना कठिन हो गया है। नियम-134ए के तहत दस प्रतिशत गरीब बच्चों को पढ़ाने की एवज में ग्रामीण क्षेत्र में 300 से 500 रुपये व शहरी क्षेत्र में 500 से 700 रुपये भी सरकार नहीं दे रहे। 24 करोड़ रुपये सरकार ने देने हैं।

संघ ने विभाग पर ये भी लगाए आरोप
- स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से भेजी जाने वाली गरीब छात्रों की लिस्ट में कुछ बच्चे ऐसे होते हैं, जिनके अभिभावकों ने दो लाख से कम आय का फर्जी सर्टिफिकेट बनाया होता है।
- शिक्षा विभाग नियम-134ए के तहत बच्चों की जो परीक्षा लेता है, उनमें भी बहुत धांधली होती है, इसलिए प्राइवेट स्कूल संचालकों ने फैसला किया है कि इस बार सरकारी अध्यापकों के साथ निजी स्कूलों के अध्यापक भी ड्यूटी देंगे, ताकि धांधली को रोका जा सके।
- बकाया राशि देने में आनाकानी की जा रही है, बकाया राशि नहीं दी गई तो फर्जी गरीब बच्चों से पूरी फीस ली जाएगी व जो बच्चा वास्तव में गरीब है, उसको निशुल्क पढ़ाएंगे।

हाईकोर्ट के आदेशों का करेंगे पालन: दास
स्कूल शिक्षा विभाग के एसीएस पीके दास ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग हाईकोर्ट के आदेशों का पालन कर गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को बंद कराएगा। निजी स्कूल संचालक इसमें सहयोग करें। किसी के साथ ज्यादती नहीं होगी। निजी स्कूल गरीब बच्चों की पढ़ाई की राशि शिक्षा निदेशालय में बिल जमा कराकर ले सकते हैं।
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