सिटी इंस्टीट्यूट में पहुंचे फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह ने केंद्र सरकार की तरफ से दिए जाने वाले अर्जुन अवॉर्ड के वितरण पर भेदभाव के आरोप लगाए हैं।
वे इस कमेटी के मेंबर रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि देश में दिए जाने वाले अर्जुन अवॉर्ड में से 60 फीसदी सम्मान महज दूसरे खेलों के ग्रुपों को खुश करने के लिए बोगस दिए जाते हैं।
पत्रकारों के साथ बातचीत में मिल्खा सिंह ने कहा कि क्रिकेट के क्षेत्र में से सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न देने से पहले इसे हाकी के जादूगर ध्यान चंद को दिया जाना चाहिए था।
हालांकि उन्होंने सचिन को भी काबिल बताया, लेकिन उन्होंने कहा कि ध्यान चंद की फाइल इस अवॉर्ड के लिए लंबे समय से दबी हुई है। यही कारण है कि उन्होंने ऐसे कई अवॉर्ड को हासिल करने से मना कर दिया।
मिल्खा सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि देश में 60 प्रतिशत अर्जुन अवॉर्ड मैनेज होते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से जो अवॉर्ड दिए जाते हैं वे दूसरे ग्रुप की नाराजगी को दूर करने के लिए दिए जाते हैं।
जैसे अगर एक फुटबाल खिलाड़ी को यह पुरस्कार दे दिया जाए और दूसरे खेलों में यह पुरस्कार न दिया जाए तो अन्य खेलों के ग्रुप आपत्ति जताने लगते हैं, जिसके बचने के कारण देश में 60 प्रतिशत अर्जुन अवॉर्ड मैनेज होते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर कोच सही में अपनी ड्यूटी दें तो देश को मेडल की कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि रोम ओलंपिक में मेडल न मिलने का उन्हें जिंदगी भर अफसोस रहेगा।
बॉक्स
मेडल की कमी के लिए खिलाड़ी जिम्मेदार
उन्होंने कहा कि देश में खल रही मेडल की कमी के लिए कहीं न कहीं खिलाड़ियों का जज्बा भी जिम्मेदार है। आज प्रत्येक वर्ष अरबों रुपये खेलों पर खर्च किए जाते हैं और खिलाड़ियों को बेहतरीन सुविधाएं मुहैया करवाई जाती हैं बावजूद इसके मेडल न मिलना देश के लिए चिंता का विषय है।
ठेके पर कोच देते हैं अच्छे नतीजे
सीटी के साथ अन्य बड़े कॉलेजों को संबोधित करते हुए फ्लाइंग सिख ने कहा कि कॉलेजों को स्पोर्ट्स को प्रमोट करने के लिए ठेके पर कोच रखने चाहिए।
वह अच्छे नतीजे देने के लिए अधिक मेहनत करते हैं इसलिए वे रेगुलर कोच से अच्छा नतीजा दे सकेंगे।