दूध कंपनियों की ग्रुपिंग आम लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। इन कंपनियों ने किसानों से खरीदे जा रहे दूध की कीमत चार से पांच रुपये किलो तक कम कर दी है लेकिन ग्राहकों को बेचे जा रहे दूध की कीमतों में कोई कमी नहीं की गई है। ग्राहकों को अब भी महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है।
प्रदेश में रोजाना करीब 15 लाख लीटर पैक्ड दूध की बिक्री हो रही है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा सहकारी कंपनी मिल्कफैड का है। मिल्कफैड के अलावा भी कई कंपनियां पैकेड दूध बेच रही हैं। मिल्कफैड सहित सभी निजी कंपनियों ने किसानों से खरीदे जा रहे दूध की कीमतों में कमी कर दी है। पंजाब में जो दूध किसानों से 5.90 रुपये प्रति लीटर खरीदा जा रहा था उसका रेट 5.30 पैसे तक आ गया है। इससे प्रति लीटर दूध का खरीद रेट चार से पांच रुपये लीटर तक कम हो गया है।
इन कंपनियों ने यह कहकर दूध के रेट बढ़ा दिए थे कि किसानों से खरीदे जा रहे दूध के रेट बढ़ाए गए हैं। अब दूध के खरीद रेट कम होने के बावजूद आम लोगों को इससे कोई राहत नहीं मिल पा रही है।
दूध का रेट कम होने के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में दूध पाउडर की कीमतों में आई भारी गिरावट को बताया जा रहा है। 180 रुपये किलो तक बिकने वाला दूध पाउडर 120 रुपये किलो तक आ गया है। वहीं देसी घी की कीमत भी 335 रुपये प्रति किलो से कम होकर 310 रुपये तक आ गई हैं। इसके चलते दूध उत्पाद बना रही कंपनियों ने दूध के रेट कम कर दिए हैं।
वहीं दूध कारोबार से जुड़े माहिरों के मुताबिक दूध खरीद के रेट अगले एक माह के बाद 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक और कम होने की संभावना है। इसके बावजूद दूध बेचने वाली कंपनियां ग्राहकों को ऊंचे दामों पर ही दूध बेच रही हैं। पंजाब में मिल्कफैड की तरफ से 34 रुपये से लेकर 44 रुपये किलो के हिसाब से दूध बेचा जा रहा है।
हरमन मिल्क फूड के एमडी एवं दूध प्रोसेसिंग एसोसिएशन के महासचिव रविंदर गर्ग ने बताया कि इन दिनों कंपनियों ने दूध की कम मांग को देखते हुए दूध के खरीद रेट कम कर दिए हैं। दूध पाउडर की कीमतों में गिरावट की वजह से दूध पाउडर एवं देसी घी की कीमतें भी गिरी हैं। इसके चलते किसानों से खरीदे जा रहे दूध के रेट कम किए गए हैं।
किसानों से खरीदे जा रहे दूध के रेट कम हुए हैं लेकिन मिल्कफैड की तरफ से फिलहाल दूध की कीमतें कम किए जाने की संभावना नहीं है। मिल्कफैड ने पिछले माह जरूर दूध के रेट कम किए थे। -एसके डुडेजा, जीएम, मिल्कफैड