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Chandigarh News: देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम है सैन्य साहित्य

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चंडीगढ़। हमारे युद्ध इतिहास को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना सशक्त भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण है। इसी वजह से राष्ट्र निर्माण में सही साहित्य सृजन होना चाहिए। यह बात पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने शुक्रवार को लेक क्लब स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में चंडीगढ़ में मिलिट्री लिट्रेचर फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह के दौरान कही।
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उन्होंने कहा कि युवाओं को मातृभूमि की सेवा में सैनिकों के बलिदानों से भरे गौरवशाली इतिहास का पूरा महत्व समझाना चाहिए। इस फेस्ट को पंजाब सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन, वेस्टर्न कमांड द्वारा आयोजित किया जा रहा है। जिसकी थीम है बहु-क्षेत्रीय युद्ध में हृदयस्थल और सीमांत क्षेत्र की शक्तियां और भारत।
युवावस्था में मोटरसाइकिल चलाने के शौकीन रहे राज्यपाल कटारिया ने कहा कि वैसे तो अब वह अवस्था नहीं है कि मोटर साइकिल चलाई जाए फिर भी यदि आयोजकों का कहेंगे तो एमएलएफ के अगले संस्करण में यह चैलेंज भी स्वीकार किया जाएगा। इस तीन दिवसीय मिलिट्री लिट्रेचर फेस्टिवल के दौरान लेक स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में मिलिट्री ऑफिसर्स, रिटायर्ड वेटरन, स्टूडेंट्स और आम जनता मौजूद रही।
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राज्यपाल ने कहा कोई दुश्मन किसी शक्तिशाली राष्ट्र को निशाना बनाने की हिम्मत नहीं करता। हमारे बहादुर सैनिकों ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से दुनिया को हमारी ताकत और शक्ति का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि दुनिया अब भारत की रक्षा क्षमताओं को पहचानती है और उनका सम्मान करती है। सेना में पंजाब के योगदान का उल्लेख करते हुए गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि विभिन्न युद्धों में पंजाब के बेटों और बेटियों द्वारा प्रदर्शित वीरता पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। इससे पहले एमएलएफ के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल टीएस शेरगिल ने कहा कि यह फेस्ट रक्षा विचार और रणनीति का एक मिश्रण है।
इस फेस्ट के दौरान समकालीन वैश्विक चुनौतियों और भविष्य के संघर्षों के लिए भारत की तैयारी पर पैनल चर्चाओं के दौरान अगले दो दिनों तक कई प्रसिद्ध वक्ता अपने विचार और विशेषज्ञ राय साझा करेंगे। इसमें बहु-क्षेत्रीय युद्ध में वायु शक्ति और ऑपरेशन सिंदूर, भारतीय और ब्रिटिश सेनाओं के बीच साझा विरासत, 1965 के भारत-पाक युद्ध की वीरता जयंती, अफग़ान-पाक क्षेत्र और ईरान में बदलती गतिशीलता जैसे विषयों पर विभिन्न पैनल चर्चा निर्धारित हैं।
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