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सर्जिकल स्ट्राइक के हीरो ने कहा- भारत-चीन में टकराव खत्म करने की कोशिश ज्यादा, प्रगति कम

Sat, 19 Dec 2020 03:13 AM IST
ajay kumar मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
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लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा (रिटायर्ड) - फोटो : ANI
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मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल (एमएलएफ) 2020 का शुक्रवार सुबह वर्चुअल समारोह के जरिये केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उद्घाटन किया। इसके बाद फेस्ट में ‘सबरे राटलिंग इन लद्दाख’ विषय पर चर्चा करते हुए उरी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की कमान संभालने वाले लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने कहा कि लद्दाख घाटी में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन के बीच बने टकराव को खत्म करने के लिए प्रयास तो काफी हो रहे हैं, मगर जमीनी स्तर पर इस संबंध में प्रगति कम ही दिख रही है। इस दौरान अन्य रक्षा विशेषज्ञों लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग, लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला, एयर वाइस मार्शल मनमोहन बहादुर, ब्रिगेडियर नवीन महाजन, ब्रिगेडियर गौरव मिश्रा और राम माधव ने भी पिछले आठ महीनों से भारत और चीन के साथ चल रही तनातनी पर चर्चा की।

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जनरल हुड्डा ने चर्चा की शुरुआत करते हुए भारत-चीन गतिरोध के अतीत, वर्तमान और भविष्य की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस टकराव को कम करने के लिए राजनीतिक, राजनयिक और सैन्य स्तर पर बातचीत का एक सिलसिला चला लेकिन जमीनी स्तर पर बहुत कम प्रगति देखने को मिली है। 


उन्होंने कहा कि हमें यह देखना होगा कि भारत और चीन दोनों ने अब तक क्या कार्रवाई की है। चीन के इरादे क्या हैं और हम इससे बेहतर क्या कदम उठा सकते थे। हमें यह भी देखना होगा कि चीन की हरकतों से हमने क्या सबक लिया। क्या इस स्थिति को निपटाने का कोई रास्ता है या फिर यह गतिरोध इसी तरह बना रहेगा। उन्होंने सवाल खड़े करते कहा कि क्या यही तनावग्रस्त स्थिति हमें अगले कुछ और महीनों या वर्षों तक देखने को मिलेगी। क्या बातचीत से यह टकराव खत्म होगा, क्योंकि सीमा पर दोनों तरफ हजारों सैनिक खड़े हैं।

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इस गतिरोध के पीछे चीन की चाल को समझना होगा

इस चर्चा में ब्रिगेडियर गौरव मिश्रा ने कहा कि आखिरकार, हमें भविष्य को देखने की जरूरत है। हम चीन को भारत के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरते देख रहे हैं। इसलिए, हमारी कूटनीतिक रणनीति क्या होनी चाहिए, हमारी राजनीतिक रणनीति क्या होनी चाहिए और हमारी सैन्य रणनीति क्या होनी चाहिए, इस बारे में गंभीरता से सोचना होगा।

हमें इस गतिरोध के पीछे चीन की चाल को समझना होगा। लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग ने कहा कि चीन ने पूर्वी लद्दाख में टकराव की स्थिति क्यों पैदा की, ऐसा करने के पीछे संभावित मकसद है, यह भी देखना होगा। ब्रिगेडियर नवीन महाजन ने भारत के साथ इस टकराव को पाक-चीन की मिलीभगत बताया। उन्होंने कहा कि चीन और पाकिस्तान के बीच एक लंबे समय से दोस्ती चली आ रही है, जो धीरे-धीरे मजबूत हो रही है।

एयर वाइस मार्शल मनमोहन बहादुर ने कहा कि सवाल किया कि यह क्या गतिरोध वास्तविक है या चीन अपनी वायु रक्षा क्षमताओं के निर्माण के लिए समय ले रहा है। लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला ने कहा कि चीन की रणनीतिक सैन्य कार्रवाइयों से हमारे रणनीतिक दृष्टिकोण और राष्ट्रीय सुरक्षा समझ में विचारों की फिर से कल्पना की जरूरत है। राममाधव ने इस बारे में भारत द्वारा उठाए जा रहे कदमों की सराहना करते हुए कहा कि इससे निश्चित रूप से अच्छे नतीजे आएंगे और भारत को अपने विकल्प खुले रखने चाहिए।
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