इस चर्चा में ब्रिगेडियर गौरव मिश्रा ने कहा कि आखिरकार, हमें भविष्य को देखने की जरूरत है। हम चीन को भारत के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरते देख रहे हैं। इसलिए, हमारी कूटनीतिक रणनीति क्या होनी चाहिए, हमारी राजनीतिक रणनीति क्या होनी चाहिए और हमारी सैन्य रणनीति क्या होनी चाहिए, इस बारे में गंभीरता से सोचना होगा।
हमें इस गतिरोध के पीछे चीन की चाल को समझना होगा। लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग ने कहा कि चीन ने पूर्वी लद्दाख में टकराव की स्थिति क्यों पैदा की, ऐसा करने के पीछे संभावित मकसद है, यह भी देखना होगा। ब्रिगेडियर नवीन महाजन ने भारत के साथ इस टकराव को पाक-चीन की मिलीभगत बताया। उन्होंने कहा कि चीन और पाकिस्तान के बीच एक लंबे समय से दोस्ती चली आ रही है, जो धीरे-धीरे मजबूत हो रही है।
एयर वाइस मार्शल मनमोहन बहादुर ने कहा कि सवाल किया कि यह क्या गतिरोध वास्तविक है या चीन अपनी वायु रक्षा क्षमताओं के निर्माण के लिए समय ले रहा है। लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला ने कहा कि चीन की रणनीतिक सैन्य कार्रवाइयों से हमारे रणनीतिक दृष्टिकोण और राष्ट्रीय सुरक्षा समझ में विचारों की फिर से कल्पना की जरूरत है। राममाधव ने इस बारे में भारत द्वारा उठाए जा रहे कदमों की सराहना करते हुए कहा कि इससे निश्चित रूप से अच्छे नतीजे आएंगे और भारत को अपने विकल्प खुले रखने चाहिए।