औरों से अलग हूं दिखने में कुछ अलग कर के ही जाउंगी।
चाह नहीं है एक अलग नाम की इसी को महान बनाउंगी,
नारी हूं मैं इस युग की नारी की अलग पहचान बनाउंगी।
कविता की इन चंद लाइनों को चंडीगढ़ की महिलाओं ने चरितार्थ कर दिखाया है। शहर की महिलाओं की टोली ने सेक्टर 40 बी स्थित हनुमंत धाम की स्थापना से लेकर संचालक तक जिम्मा उठाकर यह साबित कर दिया है कि वे सभी जिम्मेदारियों का निर्वाह बखूबी कर सकती हैं।
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भगवान हनुमान को भाई के रूप में पूजने वाली महिला सुंदरकांड सभा की महिलाओं की टोली दिन-रात उनकी चाकरी में रमी हैं। इतना ही नहीं उनकी भक्ति को करते हुए वे समाज को नई राह भी दिखा रही हैं। घर-परिवार की जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते हुए महिलाओं की ये टोली कदम दर कदम नारी सशक्तिकरण की प्रतिमूर्ति साबित हो रही हैं।
एक सोच से 32 फीट के हनुमान जी की प्रतिमा स्थापना तक के सपने को सच करना आसान नहीं था। यह कहना है महिला सुंदरकांड सभा की अध्यक्ष नीना तिवारी का, जो पिछले लगभग 40 वर्षों से राम भक्त हनुमान की भक्ति में रमी हैं। नीना ने बताया कि सन् 2000 में मलोया में सिलाई सेंटर शुरू किया। सेंटर के स्थापना दिवस पर मन में ख्याल आया कि एक ऐसा स्थान मिल जाता जहां से जरूरतमंदों के लिए काम कर पाते। मन में हनुमान जी का ख्याल आया, मानों उन्होंन उसी क्षण आर्शीवाद दे दिया हो। निवर्तमान डीसी ने अगले दिन बुलाया। मन की इच्छा पूछी और हनुमान जी के मंदिर के लिए प्लॉट दे दिया। महज 8 दिनों में लिखा-पढ़ी की कार्रवाई पूरी हुई। बस फिर जो राह शुरू हुई अब तक थमी नहीं।
हनुमान के दिल में बसे हैं करोड़ों श्रीराम नाम
नीना तिवारी ने बताया कि हमारी मंडली बच्चों को स्कूल भेजकर घर का सारा काम करके एकजुट होती थीं। बच्चों के स्कूल से लौटने से पहले सारा काम पूरा करके घर पहुंच जाते थे। मंदिर के लिए जमीन मिलने के बाद उसकी स्थापना पर ध्यान केंद्रित किया। घर-घर चंदा इकट्ठा किया। सोते-जागते बस एक ही ख्याल आता था कि मंदिर का निर्माण कार्य पूरा कराना है।
चंदा मांगने गए तो कई घरों से लौटाए गए, कहीं दरवाजे नहीं खुले, कहीं हमारा स्वागत भी हुआ। फिर हमने सोरह योजन मुख तेही ठयऊ, तुरत पनप सुत 32 भयऊ को याद करके हनुमान जी के 32 फीट की प्रतिमता बनवाने पर काम शुरू हुआ। इसके लिए हमने लोगों से राम नाम लिखकर मांगा। इसके लिए लोगों को राम नाम के ब्लॉक बनी कापियां दी गई। लगभग डेढ़ करोड़ राम-नाम लिखी कापियों की लुगदी बनाकर हनुमान जी के सीने में गारा और सीमेंट में मिलाया लगाया गया।
धर्म के साथ सामाजिक सरोकार भी
हनुमंत धाम में 32 फीट की हनुमान जी की प्रतिमा के साथ ही पंचमुखी सिंदूरी हनुमान, अखंड ज्योति, अष्ट धातु से निर्मित विशाल गदा, श्री त्रिशिवलिंगेश्वर महादेव, श्री राधा-कुष्ण, श्री रामदरबार, मां अंजनी, अष्टभुजी मां दुर्गा, सिद्धपीठ पंचमुखी श्री हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित है। नीना तिवारी ने बताया कि इसके साथ ही मंदिर में चैरिटेबल कंप्यूटर सेंटर, कोचिंग सेंटर, सिलाई सेंटर का भी संचालन किया जा रहा है। जहां जरूरतमंदों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मंदिर एक नजर में
- महिला सुंदरकांड सभा की स्थापना- सन् 1992
- मंदिर के लिए प्लॉट स्वीकृति- सन् 2000
- भूमि पूजन सन् 2002
- शिव परिवार स्थापना- सन् 2012
- पंचमुखी हनुमान जी की स्थापना- सन् 2009
- महिला मंडली की सदस्य- नीना तिवारी (संस्थापक सदस्य), मीना गुप्ता, रानी गुप्ता, सुशीला बंसल, सावित्री देवी, शांता पाठक, यशोदा देवी और तृप्ता भाटिया।