मुख्य सचिव एससी चौधरी आज प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की तालमेल समिति सदस्यों के साथ बैठक करेंगे। सरकार उनकी कुछ मांगों पर गंभीर है, मगर कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की नई रेगुलराइजेशन पॉलिसी लाने का मामला लटकने के आसार हैं। पुरानी नीतियों में रोजगार कार्यालय और विभागीय चयन समिति की शर्त हटने की उम्मीद है।
हरियाणा कर्मचारी तालमेल समिति के सदस्यों सदस्य सुभाष लांबा, अमर सिंह यादव, राजीव जौली ने कहा कि हालांकि, समिति ने अपनी बात आईएएस अनुराग अग्रवाल वाली कमेटी के सामने गत 30 जनवरी और छह फरवरी को कह दी है।
उन्हें यह बताया जा चुका है कि दो साल की सेवा पूरी कर चुके कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने में कोई कानूनी अड़चन नहीं है। सरकार इच्छाशक्ति दिखाकर हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों की तर्ज पर उन्हें पक्का करने की घोषणा करे।
उन्होंने कहा कि 29 जुलाई, 2011 को रेगुलराइजेशन पॉलिसी घोषित की गई थी। उसमें एक शर्त थी कि केवल उन कर्मचारियों को ही पक्का किया जा सकता है, जिन्हें 10 अप्रैल, 2006 से पहले दस साल हो गए हों और उनकी नियुक्ति रेगुलर पदों पर रोजगार कार्यालय या विभागीय चयन समिति के जरिए हुई हो।
इस शर्त के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी पक्का होने से वंचित हो गए थे। अब यह शर्त हटाई जा रही है। इसकी सिफारिश बिजली निगमों के एमडी अनुराग अग्रवाल वाली कमेटी कर चुकी है।
इन बिंदुओं पर आज होगी बातचीत
मुख्य सचिव एससी चौधरी की अध्यक्षता में पिछली बैठक 24 जनवरी को हुई थी। तब समय कम था, इसलिए बैठक स्थगित हो गई थी। अब उसी कड़ी में 18 फरवरी को बैठक होगी।
लांबा ने बताया कि मंगलवार की बैठक में दो साल की सेवा पूरी कर चुके पार्ट टाइम, डेलीवेसिस, वर्कचार्ज, तदर्थ, अनुबंध आधार पर लगे कच्चे कर्मचारियों को बिना शर्त पक्का करने, आऊटसोर्सिंग, पीपीपी, ठेका प्रथा नीतियों को रद्द करने, खाली पदों पर स्थाई भर्ती करने, श्रम कानूनों की पालना करने, केंद्र के समान वेतनमान देने, पंजाब से कम वेतनमान न लेने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
अगर, सरकार ने समाधान नहीं किया तो दोबारा आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस बारे में सरकार को पत्र भेज दिया गया है। श्रम कानून लागू करने के बारे में श्रम आयुक्त आनंद मोहन शरण अपनी रिपोर्ट देंगे। वेतन विसंगति मामले पर वित्त विभाग के अतिरिक्त प्रधान सचिव रिपोर्ट देंगे।