यूटी प्रशासक की सलाहकार समिति की सातवीं बैठक में हाई वोल्टेज ड्रामा के बाद देर शाम यूटी प्रशासन भाजपा नेताओं के आगे झुक ही गया। अब प्रशासन ने सलाहकार समिति की अगली बैठक किरण खेर से पूछ कर तय की है।
खेर 29 जून को चंडीगढ़ आएंगी और बैठक उनके आने के बाद 30 जून को होगी। शाम को प्रशासन के अधिकारियों ने खेर को फोन कर उनसे बात की। इससे पहले यूटी के प्रशासक की सलाहकार समिति की वीरवार को हुई सुबह 11 बजे सातवीं बैठक में हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ।
प्रशासक शिवराज पाटिल के साथ हुई बहस के बाद भाजपा से संबंधित समिति के तीन सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। चंडीगढ़ की सांसद किरण खेर से बिना पूछे बैठक की तारीख तय करने पर हुई बहस के बाद उन्होंने यह कदम उठाया। बहिष्कार करने वालों में पूर्व सांसद सत्यपाल जैन, भाजपा चंडीगढ़ के अध्यक्ष संजय टंडन और भाजपा जिला परिषद के चेयरमैन भजन सिंह माड़ू शामिल थे।
सांसद से पूछे बिना तय की थी मीटिंग
सुबह 11 बजे बैठक शुरू होने के तुरंत बाद सत्यपाल जैन ने कहा कि वह एक गंभीर मुद्दे पर बात करना चाहते हैं। इस पर पाटिल ने जैन से कहा कि पहले वे सदस्यों को संबोधित कर लें, इसके बाद उन्हें बोलने का मौका दिया जाएगा।
पाटिल के संबोधन के बाद जैन ने कहा कि शहर के लोगों ने जिसे सांसद चुना है, प्रशासन ने उनसे पूछे बिना ही बैठक की तारीख तय कर दी। जिस बैठक में मास्टर प्लान जैसे अहम मुद्दे पर चर्चा होनी है, उसी बैठक में खेर को बुलाना जरूरी नहीं समझा गया।
इस पर पाटिल ने कहा कि जिस तरह से समिति के अन्य 33 सदस्य हैं, उसी तरह से किरण खेर भी समिति की सामान्य सदस्य हैं। सभी से पूछकर बैठक की तारीख तय करना संभव नहीं है। मास्टर प्लान में पहले से काफी देरी हो चुकी है और इसलिए यह बैठक जल्दी बुलानी जरूरी थी।
प्रशासक और भाजपा नेताओं में तीखी बहस
जैन ने कहा कि खेर चंडीगढ़ की सांसद हैं और प्रोटोकाल के हिसाब से उनका इस बैठक में दूसरे नंबर पर आता है। इस पर पाटिल ने कहा कि चंडीगढ़ के पूर्व सांसद केंद्र में मंत्री थे। इसके बाद भी उनसे कभी भी पूछ कर बैठक की तारीख नहीं तय की गई। वहीं जैन का समर्थन संजय टंडन ने भी किया।
इस पर पाटिल ने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा कि सलाहकार समिति की अगली बैठक की तारीख तय करने से पहले वे सांसद से नहीं पूछेंगे। यह सुनते ही जैन और टंडन भड़क गए। उन्होंने कहा कि इस तरह से शहर का विकास नहीं हो सकता। प्रशासक को अपना माइंडसेट बदलने की जरूरत है।
इतना कहते हुए जैन और टंडन ने बैठक का बहिष्कार किया और बाद में उनके साथ भजन सिंह भी आ गए। प्रशासक के सलाहकार केके शर्मा ने जैन को समझाने की कोशिश भी की, लेकिन वे नहीं माने।
बहिष्कार के बाद नेताओं ने ये कहा
चंडीगढ़ की सांसद किरण खेर ने कहा कि बैठक का बहिष्कार करना सही कदम था। चंडीगढ़ की जन प्रतिनिधि से बिना पूछे बैठक रख ली गई थी तो इसका विरोध तो होना ही था। पाटिल को शहर के सांसद के बारे में ऐसा नहीं कहना चाहिए था। अगर पाटिल जी यह कहते हैं कि बैठक तय करने से पहले उन्हें सांसद से पूछने की जरूरत नहीं है तो यह उनका अधिकार है। लेकिन हमारा अधिकार विरोध करना है और हम इस मुद्दे को गृह मंत्रालय के समक्ष उठाएंगे।
भाजपा नेता और पूर्व सांसद सत्यपाल जैन ने कहा कि चंडीगढ़ में 10 वर्षों से सांसद और प्रशासक के बीच विवाद होता रहा है। इससे शहर का कामकाज प्रभावित होता है। प्रशासन को यह चीज समझने की जरूरत है। पाटिल जी की मैं बहुत इज्जत करता हूं। मेरा सिर्फ यही तर्क था कि शहर के लोगों द्वारा चुने गए सांसद से पूछ कर बैठक की तारीख तय करनी चाहिए थी ताकि वह बैठक में शामिल हो सकें।
चंडीगढ़ के भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन ने कहा कि प्रशासन को सांसद से पूछे बिना बैठक नहीं रखनी चाहिए थी। प्रशासन को सांसद के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। इसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।