सीएचबी ने 1 मार्च को बोर्ड की बैठक बुला ली है। इस बैठक में बिना मंजूरी के सीईओ डॉ. एसबी दीपक कुमार द्वारा अपनी सरकारी कोठी (कैंप ऑफिस) और खरीदे गए सामान पर 22 लाख 94 हजार रुपये खर्च करने का मामला उठ सकता है हालांकि बोर्ड की ओर से जो एजेंडा सदस्यों को भेजा गया है, उसमें इसका जिक्र नहीं है लेकिन नान आफिशियल सदस्य प्रेम कौशिक ने इस मामले को उठाने का मन बनाया है।
मालूम हो कि जनवरी माह में बैठक में इस मामले में जांच रिपोर्ट भी पेश हो चुकी है। इसके बाद यह निर्णय लिया गया था कि 4 फरवरी तक सीईओ दीपक कुमार को पक्ष रखने का समय देकर बैठक बुला ली जाए। लेकिन 5 फरवरी की बैठक बिना कारण बताए टाल दी गई थी।
जनवरी माह में बोर्ड के सदस्यों ने यह भी निर्णय लिया था कि जिस अधिकारी ने सीईओ डॉ. दीपक कुमार के घर की रेनोवेशन और वहां पर खरीदे गए सामान का बजट पास किया है, जिस अधिकारी ने भुगतान के लिए चेक पर हस्ताक्षर किए हैं, उनके नामों की जानकारी बोर्ड की बैठक में दी जाए।
जांच रिपोर्ट के अलावा यह भी निर्णय गया था कि भविष्य में इस तरह के अधिकारियों के मकानों पर किस तरह से खर्च किया जा सकता है और किस प्रक्रिया के तहत करना है। इसके लिए पॉलिसी बैठक में लाई जाए। लेकिन एजेंडे में पालिसी का उल्लेख नहीं किया गया है।
प्रेम कौशिक का कहना है कि जनवरी माह की बैठक में जांच रिपोर्ट आई थी उसमे स्पष्ट कहा गया था कि बिना मंजूरी के सीईओ ने 22 लाख की राशि खर्च की है। उनका कहना है कि बेशक एजेंडे में इस संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं है लेकिन वह बैठक में जांच रिपोर्ट के बारे में पूछेंगे। उस मामले का क्या स्टेटस है यह बात सबके सामने आनी ही चाहिए। भविष्य के लिए भी अधिकारियों के मकानों पर खर्च संबंधी पालिसी बननी चाहिए।
जांच रिपोर्ट में क्या कहा गया है
रिपोर्ट में बताया गया है कि सीईओ ने इस खर्च का निर्णय अपने स्तर पर लिया है। बोर्ड और चेयरमैन से यह खर्च पास नहीं कराया गया है। जांच रिपोर्ट में सचिव ने कहा है कि जो मकान के रेनोवेशन के लिए चीजें खरीदी गई हैं, उसकी तत्काल जरूरत भी नहीं थी। कुल 22 लाख 94 हजार 229 रुपये सीएचबी के फंड से भुगतान किया गया।
रिपोर्ट में यह भी कहा है कि घर के लिए आइटम शहर के महंगे आउटलेट्स से से खरीदे गए। यहां तक कि सीईओ के घर का बिजली बिल का भुगतान भी सीएचबी फंड से किया गया है। यह जांच चेयरमैन मनिंदर सिंह बैंस के आदेश पर सचिव आईएएस डॉ. अदप्पा कार्तिक ने की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सीईओ ने इस खर्च का निर्णय अपने स्तर पर लिया है। बोर्ड और चेयरमैन से यह खर्च पास नहीं कराया गया है।
सदस्यों को जो प्रस्ताव भेजे गए है उसमे सेक्टर-56 के 60 मकानों का भविष्य तय किया जाए। यह मकान किस्ते जमा न होने से या अन्य कारणों से हाउसिंग बोर्ड ने खारिज कर दिए हैं। इन मकानों की अलाटमेंट को फिर से रिव्यू करने के लिए प्रस्ताव चर्चा के लिए लाया जा रहा है। इसके अलावा सीए की नियुक्ति के लिए भी प्रस्ताव चर्चा में लाया जा रहा है।