पिछले काफी समय से नगर निगम वित्तीय संकट से जूझ रहा है। पैसे नहीं होने की वजह से विकास कार्यों के काम रुके हुए हैं। सिर्फ इमरजेंसी नेचर के कार्यों के टेंडर ही लग रहे हैं। वार्ड के छोटे-छोटे कामों के टेंडर भी पैसों की कमी की वजह से रुके हुए हैं। इसे लेकर पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने भी 24 अक्तूबर को बैठक बुलाई है लेकिन इससे पहले मंगलवार को ही मेयर ने सदन की विशेष बैठक रख ली है।
मेयर कुलदीप कुमार ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 के लिए निगम का कुल खर्च करीब 1110 करोड़ रुपये है लेकिन खुद की कमाई और प्रशासन से मिले ग्रांट से कुल करीब 910 करोड़ रुपये ही जुटाए जा सकेंगे। करीब 200 करोड़ का डिफिसिट हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर यह 200 करोड़ निगम को नहीं मिले तो कर्मचारियों को वेतन देना भी मुश्किल हो जाएगा। बैठक में निगम की खाली पड़ी संपत्तियों की नीलामी, फिजूलखर्ची, संपत्ति कर, पानी का बिल समेत अन्य माध्यम से आने वाले राजस्व पर चर्चा होगी।