बेटी की उपलब्धि से सीना चौड़ा हो गया
गुड़गांव से खुशी पांडे अपने पिता विष्णु कुमार पांडे के साथ आई थीं। दसवीं में जिले में उसका दूसरा स्थान रहा है। विष्णु कुमार पांडे ने बताया कि उनकी चार बेटियां हैं। सभी बेटियों को वह पढ़ा रहे हैं। खुशी ने पढ़ाई के दौरान किसी भी विषय की ट्यूशन नहीं ली। उन्होंने बताया कि बच्चों की पढ़ाई के लिए एक अभिभावक को जो त्याग करने पड़ते हैं, वह सब उन्होंने किया है। घर पर पढ़ाई का माहौल बना रहे, इसलिए वह ज्यादा कहीं जाते नहीं। आज उनकी बेटी ने जो कामयाबी पाई, उससे उनका सीना चौड़ा हो गया है।
छात्रा खुशी पाण्डेय अपने पिता विष्णु कुमार पाण्डेय के साथ।
बेटी के सम्मान की खबर से तीन दिन से सोए नहीं
चरखी दादरी की खुशबू अपनी बुआ कविता के साथ आई थी। वह बारहवीं में नॉन मेडिकल की टॉपर रही हैं। उनकी बुआ कविता ने बताया कि खुशबू के छह भाई हैं। इनमें चार भाई फौज में हैं। सिर्फ खुशबू के पिता खेती करते हैं। इसके बावजूद उनका मजबूत इरादा है कि उनकी बेटी पढ़-लिखकर फौज में अफसर बनें। एग्जाम के दौरान उनके माता-पिता ने पढ़ाई का पूरा माहौल बनाकर रखा। खुशबू भी पूरी रात पढ़ती थी। कविता ने बताया कि खुशबू के सम्मान से परिजन इतने खुश हैं कि घर वाले दो-तीन दिन से सोए नहीं हैं।
12वीं की छात्रा खुशबू अपनी बुआ कविता के साथ।
पिता नहीं पढ़े, बेटी को जरूर पढ़ाएंगे
सिरसा के रानिया से आईं चंचल सिंह अपनी बेटी सरकीरत कौर के साथ आए थे। सनकीरत ने कहा कि उनके पिता ने खुद पढ़ाई नहीं की है, लेकिन वह अपनी बेटी को मन से पढ़ा रहे हैं, यही बड़ी बात है। चंचल सिंह खेतीबाड़ी करते हैं। वह ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं है, लेकिन अब बेटी को बहुत मेहनत से पढ़ा रहे हैं। सनकीरत अब आईआईटी की पढ़ाई कर रही है। इसके लिए चंचल सिंह ने खुद से बेटी को कोचिंग करवाई। इस खास मौके पर चंचल सिंह ने बताया कि वह अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। जब तक उनकी बेटी पढ़ना चाहेगी, वह पढ़ाते रहेंगे। उन्होंने बताया कि गांव को जब पता चला कि बेटी को सीएम सम्मानित करेंगे, तब से गांव में उनकी बेटी की चर्चा है।
पहले मां ने मदद की, अब भाई पढ़ा रहा है
यमुनानगर से आए अर्जुन को देखते ही खुशी बनती है। वह बेहद गरीब परिवार से आते हैं। वह अपने जिले में दसवीं के टॉपर हैं। अर्जुन ने बताया कि उनके पिता नहीं है। उनकी मां फैक्ट्ररी में काम करती हैं। अर्जुन ने बताया कि मां के कमाए पैसों से ही उन्होंने अपने स्कूल की फीस भरी है। जब मां उनको फीस देती थी तो उनके मन में सिर्फ एक ही चीज घूमती थी कि मां ने मेहनत कर स्कूल की फीस भरी है। अर्जुन ने बताया कि उनका भाई पोस्टमैन है। अब वह आर्थिक तौर उनकी मदद कर रहा है।
छात्र अर्जुन अपने बड़े भाई करण के साथ।
बेटे को पढ़ाई का समय मिले, इसलिए कभी कोई काम कहा
फतेहाबाद से आए दसवीं के स्टेट टॉपर हिमेश सोनी के पिता राजेश ने बताया कि घर पर उन्होंने पढ़ाई का पूरा माहौल बनाया। बच्चा पढ़ाई को लेकर विचलित न हो, इसके लिए पूरा समय दिया। उसे कभी कोई काम नहीं कहा। उसकी जो भी जरूरत होती थी, उसे पूरा किया। हिमेश ने बताया कि वह आईएएस बनना चाहता है। इसके लिए उसने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। उसने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने पिता को दिया है। उसने बताया कि मैं ठीक से पढ़ाई कर सकूं, इसलिए मेरे पिता ने मुझे पूरा सहयोग किया।
हिमेश सोनी अपने पिता राजेश सोनी के साथ।