Municipal Corporation office Chandigarh
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नगर निगम चुनाव का रंग शहर की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशनों को भी चढ़ गया है। फासवेक की रविवार को सेक्टर-21 के सामुदायिक केंद्र में हुई बैठक में निगम चुनाव लड़ने के मुद्दे पर जमकर चर्चा हुई। अधिकतर रेजिडेंट्स ने यह प्रस्ताव रखा कि फासवेक को अपने उम्मीदवार मैदान में उतारने चाहिए।
जबकि, कुछ एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि उम्मीदवार न उतारकर समर्थन भी दिया जा सकता है। बैठक में फैसला हुआ कि फासवेक की कोर कमेटी की बैठक जल्द बुलाई जाएगी। जिसमें चुनाव के लिए उम्मीदवार उतारने और समर्थन देने के प्रस्ताव पर फैसला किया जाएगा। फासवेक के वाइस चेयरमैन हितेश पुरी ने कहा कि जो फैसला कोर कमेटी में होगा उसे एक बार फिर से शहर की सभी रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशनों के समक्ष लाया जाएगा।
जबकि, सेक्टर-20 आरडब्लूए के अध्यक्ष ओपी वर्मा ने आजाद उम्मीदवार के तौर पर किसी भी रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी को खड़े न होने की बात की। फासवेक चेयरमैन बलजिंदर बिट्टू ने कहा कि चुनाव में वहीं उम्मीदवार निर्दलीय के तौर पर खड़ा हो जिसे पूरे शहर का समर्थन मिले। उनका कहना है कि हरियाणा की तर्ज पर चंडीगढ़ में भी पार्षद के चुनाव पार्टी स्तर पर नहीं होने चाहिए।
गुप्ता ने बिट्टू को वार्ड नंबर-8 से उम्मीदवारी का प्रस्ताव
नगर निगम, चंडीगढ़
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सेक्टर-38 से आए पकंज गुप्ता ने मीटिंग में फासवेक के चेयरमैन बलजिंदर सिंह बिट्टू को वार्ड नंबर-8 से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया। गुप्ता ने कहा कि पूरे वार्ड की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन उनके साथ है। मालूम हो कि यह वार्ड मेयर अरुण सूद का है। बैठक में सेक्टर-8 के रविंदर गिल ने हेरिटेज चोरी होने की वारदात की निंदा की।
चेयरमैन का व्यवहार ठीक नहीं था
बैठक में फासवेक के वाइस चेयरमैन हितेश पुरी ने बताया कि पिछले दिनों प्रतिनिधिमंडल सीएचबी की समस्याएं लेकर चेयरमैन मनिंदर सिंह बैंस के पास गया था। लेकिन, चेयरमैन का फासवेक के प्रतिनिधिमंडल के प्रति व्यवहार ठीक नहीं था। पुरी ने बैठक में बताया कि चेयरमैन ने कहा कि जब पूर्व सीईओ दीपक कुमार के साथ विवाद चल रहा था तब फासवेक चुप थी।
बिट्टू लड़ सकते है चुनाव
फासवेक चेयरमैन बलजिंदर सिंह बिट्टू नगर निगम चुनाव लड़ सकते हैं। कांग्रेस पार्टी की ओर से बिट्टू को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। पिछली बार बिट्टू कांग्रेस से वार्ड नंबर-17 के टिकट मांगा था। लेकिन, टिकट न मिलने पर वह निर्दलीय के तौर पर चुनाव भी लड़ा था। लेकिन, वह हार गए थे। अगर बिट्टू किसी राजनीतिक दल की टिकट पर चुनाव लड़ते है, तो उन्हें चेयरमैन पद से इस्तीफा देना होगा। क्योंकि, फासवेक के संविधान के अनुसार कोई भी पदाधिकारी पद पर रहते हुए चुनाव नहीं लड़ सकता।