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एमसी चुनाव: मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर के लिए भारी है चुनावी साल

Wed, 02 Nov 2016 01:38 AM IST
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ के मेयर अरुण सूद अपने टीम सदस्यों के साथ - फोटो : File Photo
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नगर निगम के हर पांच साल के कार्यकाल में जो भी अंतिम मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर बनता है, उस पर चुनावी साल भारी रहता है। उसे या तो पार्टी टिकट नहीं देती या फिर वह चुनाव हार जाता है। निगम का अब तक का इतिहास यही है। जबकि जो भी कार्यकाल के अंतिम साल में मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर बनता है, उस पर पार्टी के अन्य उम्मीदवारों को भी जितवाने का दारोमदार होता है। इस साल भाजपा ने 15 साल बाद मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर की कुर्सी पर कब्जा किया है। इस समय मेयर अरुण सूद और सीनियर डिप्टी मेयर देवेश मोदगिल हैं। अब देखना होगा कि क्या वे इस सिलसिले को तोड़ पाएंगे।
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इतिहास गवाह है
निगम का पहला चुनाव दिसंबर 1996 में हुआ था। कार्यकाल 1 जनवरी 1997 में शुरू हुआ था। इस कार्यकाल में पांचवें मेयर राज कुमार गोयल और सीनियर डिप्टी मेयर गुरचरण दास काला बने थे। 2001 में गोयल को फिर से पार्टी ने किसी भी वार्ड से चुनाव लड़ने की टिकट नहीं दी। जबकि काला चुनाव लड़े, लेकिन वह कांग्रेस के उम्मीदवार सुरेंद्र सिंह से हार गए।

2002 से 2006 के कार्यकाल के अंतिम साल सुरेंद्र सिंह को मेयर बनने का मौका मिला, जबकि श्यामा नेगी सीनियर डिप्टी मेयर बनीं। उसी साल दिसंबर में हुए चुनाव में सुरेंद्र सिंह चुनाव हार गए, जबकि श्यामा नेगी को कांग्रेस से टिकट नहीं मिली।
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2007 से 2011 के कार्यकाल के 5वें साल रविंदर सिंह पाली को मेयर बनने का मौका मिला। उस समय पाली का वार्ड महिला के लिए रिजर्व होने के कारण उन्हें टिकट नहीं मिली। जबकि पाली ने खुद भी चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था। उस समय 2011 में सीनियर डिप्टी मेयर की कुर्सी पर कुलदीप सिंह थे, लेकिन वह भी फिर से चुनाव नहीं लड़ पाए।
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2006 तक डिप्टी मेयर भी हारते रहे

नगर निगम, चंडीगढ़ - फोटो : demo pics
2006 तक डिप्टी मेयर भी हारते रहे
2006 तक के कार्यकाल में 5वें साल में डिप्टी मेयर के साथ भी ऐसा होता रहा। साल 2001 में डिप्टी मेयर मोहिंदर सिंह और 2006 में हरमोहिंदर सिंह लक्की डिप्टी मेयर थे। लक्की 2006 में वार्ड नंबर-16 से चुनाव लड़े थे, लेकिन वह चुनाव हार गए थे। लेकिन 2011 में शीला फूल सिंह डिप्टी मेयर थीं। वह उस कार्यकाल में कांग्रेस की टिकट पर लड़ीं और चुनाव जीत गईं।

शीला फूल सिंह एकमात्र ऐसी पार्षद हैं जा पांच साल के कार्यकाल में तीन बार डिप्टी मेयर बनीं। मालूम हो कि नगर निगम में मेयर, सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर का कार्यकाल एक साल का होता है।

वैसे भी कम समय मिलता है
वैसे भी जो पांचवें साल मेयर, सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर बनता है, उसे काम करने के लिए काफी कम समय मिलता है। इसका कारण यह है कि उसी साल के अंत में चुनाव होते हैं और उससे एक माह पहले 15 नवंबर को आचार संहिता भी लागू हो जाती है। इस साल मेयर अरुण सूद का कार्यकाल वैसे भी 8 दिन देरी से शुरू हुआ है, क्योंकि 8 जनवरी को मेयर के चुनाव हुए थे। 2015 से पहले तक 1 जनवरी को ही मेयर के चुनाव होते रहे हैं।
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