फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किशनगढ़ की हालात देखकर मेयर हुईं दंग

विज्ञापन
विज्ञापन
मनीमाजरा। गांव किशनगढ़ की खस्ता हालात की रोजाना अमर उजाला द्वारा प्रमुखता से खबर छापने के बाद वीरवार दोपहर नगर निगम की मेयर राजबाला मालिक गांव का दौरा करने पहुंची। इस दौरान उनके साथ सीनियर डिप्टी मेयर रविकांत शर्मा, डिप्पी मेयर जगतार सिंह जग्गा, ग्रामीण विकास कमेटी की चेयरपर्सन कमल शर्मा और उनकी टीम थी। गांव के हालत देखकर मेयर ने कहा कि पता नहीं, कैसे लोग यहां रह रहे हैं।
विज्ञापन

गांव के युवा नेता नरेंद्र पाल लुभाना ने मेयर व समूह टीम को सारे गांव का पैदल दौरा करवाया और मेयर व एडिशनल कमिश्नर-2 एसके जैन और उनकी टीम को गांव के बंद पड़ी सीवरेज, टूटी हुई सड़कें और सड़कों पर बहते सीवरेज के पानी का जायजा करवाया और गांव की बदहाली का आलम सुनाया।
अमर उजाला का आभार जताते हुए लुभाना ने कहा कि उनकी बदौलत आज अधिकारी गांव की सुध लेने पहुंचे। कि अमर उजाला की गांव की हर समस्या को प्रमुखता उठा कर छापा। जिसके बाद मेयर के साथ सरकारी अधिकारियों ने आकर गांव की हालात तो जानी। वहीं लुभाना ने मेयर को बताया कि हर साल मार्च महीने में लोग 20-20 की टोलियां बनाकर आसपास से पानी भरकर लाते हैं और अब फिर से मार्च में इस समस्या का सामना करना पड़ेगा।
विज्ञापन

मेयर ने काम शुरू करने को कहा तो अफसर बोले- छह महीने लगेंगे
लुभाना ने बताया कि मेयर ने गांव के हालात देखकर सभी अफसरों को फटकार लगाई और जल्द से जल्द काम शुरू करवाने के लिए कहा। इस पर अफसर थोड़े सुस्त दिखे और कहने लगे कि इसमें समय लगेगा। लुभाना ने अफसरों के ट्यूबवेल न होने के तर्क को काटते हुए बोला कि लाल डोरे के अंदर हमारे पास जमीन है, जहां ट्यूबवेल लग सकता है। उन्होंने वह जमीन भी दिखाई, इस पर अफसर राजी हुए और कहां यहां हम दो महीने में ट्यूबवेल लगवा देंगे। जब जिला परिषद के पूर्व चेयरमैन भजन सिंह माडू ने पूछा कि कितना समय लगेगा तो कमिश्नर एसके जैन ने 6 से 8 महीने लगने की बात कही। लोगों ने इस पर गुस्से में कहा कि अगर आपने अपनी किसी कोठी या बंगले का काम सरकारी खर्च से करवाना हो या कोई सरकारी गाड़ी लेनी हो तो आप इसके लिए चार दिन में बजट पास करवा लेते हैं और जब आमजन की बात आती है तो आप 6-8 महीनों का हवाला देने लगते हैं। लोगों ने यह भी बताया कि पिछले साल नगर निगम टैंकर भेजता था तो टैंकर तंग गलियों के अंदर नहीं जा पाते थे। इससे उन्हें काफी ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता था।
अधिकारियों को गांव में लाने पर लोगों ने ‘अमर उजाला’ का जताया आभार
लोगों ने कहा कि यह तो हम धन्यवाद करते हैं इस अखबार का जिन्होंने हमारी आवाज आप लोगों तक पहुंचाई और आपको हमारे गांव में आना पड़ा नहीं तो इससे पहले भी बार-बार आग्रह करने पर भी प्रशासन और नगर निगम के अफसरों के कान पर जूं नहीं रेंगी। जनता ने यह भी कहा कि जहां एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छता की बात करते हैं व हमारे शहर चंडीगढ़ का नाम स्मार्ट सिटी की रैंकिंग में नंबर 1 के लिए चलाया जाता है। वहीं चंडीगढ़ के अभिन्न अंग जो इसके गांव हैं, वहां पर रहने वाले लोगों के हालात दिल्ली या मुंबई की झुग्गियों में रहते जनता से भी बदतर हैं। वहां पर लोगों को कम से कम मूलभूत सुविधाएं तो प्राप्त हैं पर यहां तो मूलभूत सुविधाओं की भी कमी है।
लोग बोले- मेयर सीवरेज के पानी में से गुजरीं, अब देखते हैं कितने दिन में होता है हल
लोगों ने कहा कि मेयर हमारे साथ टूटी हुई सड़कों पर बहते सीवरेज के पानी के बीच में से चलकर तो निकल गई पर अब यह देखना होगा कि वह इस बदहाली को कैसे व कितने दिन में ठीक करावाती है। वहीं लुभाना ने कहा कि मेयर के आने के बाद लग रहा है कि उनके कहने से हमारे गांव का हाल जल्द ही बदलेगा।
मेयर के साथ पहुंचे लंदन के पर्यावरण प्रेमी
गांव किशनगढ़ के दौरे के दौरान मेयर राजा बाला मलिक के साथ लंदन से तीन पर्यावरण प्रेमी भी आए थे। हालांकि उन्हें अभी अपनी परियोजना और नगर निगम के साथ किसी प्रकार के करार होने से मना किया।
क्या कहते है लोग
मेयर के दौरे से आश्वासन मिला है कि हमारे गांव में विकास कार्य जल्द शुरू होने लगेंगे। पहले तो अफसर हमारी सुनते नहीं थे। यही नहीं आज भी वे आनाकानी कर रहे थे पर अब उन्हें हालात सुधारने के लिए तेजी से काम करना पड़ेगा। -धर्मपाल चक्की वाले
हमने मेयर को अपने गांव के हालात दिखाए। उन्होंने अफसरों को लताड़ लगाते हुए बोला कि किशनगढ़ गांव विकास की दृष्टि से सारे चंडीगढ़ में सबसे पिछड़ा हुआ गांव है। अपना सारा ध्यान इस गांव पर लगाकर सारी समस्याएं दूर करें। -भजन सिंह माडू, पूर्व चेयरमैन जिला परिषद
मैं जब गांव का सरपंच बना था तो उस समय आबादी के हिसाब से सहूलियतें थीं पर जनसंख्या बढ़ गई पर सहूलियतें नहीं बढ़ीं। हमारे समय में अफसर हमारी बात सुनते थे पर अब अफसर न किसी की सुनते और न ही किसी की मानते हैं। - कमल सिंह, पूर्व सरपंच, गांव किशनगढ़
किशनगढ़ गांव के हालात कालोनियों से भी बदतर हो गए हैं। जब हम किसी को बताते हैं कि हम किशनगढ़ में रहते हैं तो सुनने वाला रिश्तेदार या दोस्त कहते हैं कि आप अपने गांव की सीवरेज व सड़क व्यवस्था सुधरवा नहीं सकते तो घर बेचकर कहीं और रहें। -सरवन सिंह
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें