चंडीगढ़ में प्रतिदिन लगभग 450-500 मीट्रिक टन ठोस कचरा उत्पन्न होता है। वर्तमान में इस कचरे के निपटान के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। निगम एक बड़ा प्लांट लगाने की तैयारी में है।
चंडीगढ़ के मेयर के कार्यकाल के लिए कुलदीप कुमार के पास कुछ दिन बचे हैं। ऐसे में वह जाते-जाते डड्डूमाजरा के लोगों को वहां लगने वाले गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट से मुक्ति दिलाना चाहते हैं। उन्होंने पंजाब के राज्यपाल व यूटी प्रशासक गुलाबचंद कटारिया को पत्र लिखकर मोहाली में 20 एकड़ जमीन की मांग की है।
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मेयर का कहना है कि डड्डूमाजरा की जगह मोहाली में जमीन लेकर बड़ा गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट लगाया जाए। उनका तर्क है कि पंजाब और हरियाणा के सारे अधिकारी चंडीगढ़ में रहते हैं, उनके दफ्तर भी यहीं हैं। ऐसे में कूड़ा प्रोसेस करने के लिए अगर चंडीगढ़ में जगह नहीं है तो मोहाली को जगह देनी चाहिए।
नगर निगम के एक अधिकारी के अनुसार शहर में प्रतिदिन लगभग 450-500 मीट्रिक टन ठोस कचरा उत्पन्न होता है। वर्तमान में इस कचरे के निपटान के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। निगम एक बड़ा प्लांट लगाने की तैयारी में है। इसके लिए वर्तमान डंपिंग ग्राउंड की साइट का ही चयन किया गया है, लेकिन वहां के लोग विरोध कर रहे हैं।
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लोगों का कहना है कि एक बार प्लांट लग गया तो डड्डूमाजरा के लोग हमेशा बदबू से परेशान रहेंगे। वर्तमान मेयर कुलदीप कुमार भी डड्डूमाजरा में ही रहते हैं। ऐसे में वह प्लांट को कहीं और शिफ्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि यह प्लांट नगर निगम अपने स्वयं के खर्च पर बनाएगा और मोहाली के कचरे को भी प्रो-रेटा आधार पर प्रोसेस करने के लिए तैयार है।