चंडीगढ़ में मेयर चुनाव का बिगुल बज गया है। 12 जनवरी को नामांकन और 17 जनवरी को सुबह 11 बजे नगर निगम भवन में चुनाव होगा। इस संबंध में डीसी यशपाल गर्ग ने सोमवार को आदेश जारी किया है। चुनाव के लिए मनोनीत पार्षद अमित जिंदल को पीठासीन अधिकारी बनाया गया है। चुनाव तिथियों की घोषणा के साथ भाजपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के नाम पर मंथन शुरू हो गया है। बैठकों का दौर जारी है।
अटकलें हैं कि पिछली सदन की बैठक में हुए हंगामे के बाद भाजपा का मेयर बनने से रोकने के लिए इस बार आम आदमी पार्टी और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ सकती है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि मेयर और डिप्टी मेयर का पद आम आदमी पार्टी अपने पास रख सकती है, जबकि सीनियर डिप्टी मेयर का पद कांग्रेस को दिया जा सकता है, क्योंकि अकेले दम पर कोई भी पार्टी अपना मेयर नहीं बना सकती है। हालांकि अभी तक आप और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने खुलकर इस बात की पुष्टि नहीं की है। उधर, भाजपा का दावा है कि पिछली बार की तरह इस बार भी मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पद पर जीत दर्ज करेगी।
चुनाव जीतने के लिए किसी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं
नगर निगम में इस समय किसी भी दल के पास मेयर चुनाव जीतने के लिए स्पष्ट बहुमत नहीं है। आप के 14, भाजपा के 14, कांग्रेस के छह और अकाली दल का एक पार्षद है। इसके अलावा मेयर चुनाव में एक वोट सांसद किरण खेर का है, इसलिए भाजपा के पास 15 वोट हैं लेकिन चुनाव में बहुमत का आंकड़ा 19 है और ये जादुई आंकड़ा किसी भी एक पार्टी के पास नहीं है। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने बहिष्कार किया था, जिस कारण भाजपा और आप में कड़ी टक्कर के बावजूद भाजपा अपना मेयर बनाने में कामयाब रही थी।
एक वोट रद्द हुआ तो बना भाजपा का मेयर, हाईकोर्ट तक गया मामला
पिछले चुनाव में भाजपा ने सरबजीत कौर और आप ने अंजू कत्याल को मेयर प्रत्याशी बनाया था। मेयर पद के लिए कुल 28 वोट पड़े। वोटों की गिनती के दौरान आम आदमी पार्टी का एक वोट खारिज कर दिया गया, इसलिए भाजपा के प्रत्याशी को 14 और आप के प्रत्याशी को 13 वोट मिले। वोट रद्द करने के पीछे पीठासीन अधिकारी ने तर्क दिया कि बैलेट पेपर फटा हुआ था, इसलिए उसे वोट नहीं माना जा सकता। सदन में काफी हंगामा हुआ। आप और भाजपा के पार्षद आपस में भिड़ गए। मिलीभगत और धांधली का आरोप लगाते हुए आप ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया लेकिन कोई राहत नहीं मिली।