कांग्रेस की पूनम शर्मा चंडीगढ़ की 21वीं मेयर बन गई हैं। आज हुए चुनाव में पूनम को 17 वोट मिले। भाजपा की हीरा नेगी को 15 वोट मिले। मनोनीत पार्षद सतपाल बंसल और डॉ. अमृत तिवारी अनुपस्थित रहे। एक की वोट इनवैलिड रही।
विज्ञापन
मेयर पद के भाजपा की हीरा नेगी और कांग्रेस की पूनम शर्मा में टक्कर थी। इस साल मेयर पद महिला आरक्षित था। दोनों ही पार्टियां इस बार जमकर चुनाव प्रचार में जुटी।
हमेशा की तरह इस बार भी मनोनीत पार्षद ही किंगमेकर साबित हुए। भाजपा-अकाली दल के पास सांसद समेत 14 वोट थे और उन्हें मेयर बनाने के लिए 4 वोट और चाहिए थे। कांग्रेस के पास अपने 9 पार्षद हैं और इतने ही वोट उन्हें और चाहिए थे।
विज्ञापन
मेयर चुनाव में खड़े थे ये उम्मीदवार
भाजपा- हीरा नेगी, मेयर - उम्र 50 वर्ष - बारहवीं पास - समाजसेवा में सक्रिय - मौजूदा सीनियर डिप्टी मेयर - 2011 में पहली बार वार्ड-21 से पार्षद बनीं - 1990 में बूथ लेवल पर राजनीति शुरू की
राजेश गुप्ता, सीनियर डिप्टी मेयर - उम्र 50 वर्ष - ग्रेजुएट - बिजनेसमैन -तीन बार चुनाव लड़े, दो बार पार्षद बने -वार्ड नंबर-16 से मौजूदा पार्षद
देवेश मौदगिल, डिप्टी मेयर -उम्र 38 वर्ष -एमए(पॉलिटिकल साइंस), लॉ ग्र्रेजुएट - पेशे से वकील -मौजूदा डिप्टी मेयर - 2011 में वार्ड नंबर-22 से जीते
कांग्रेस- पूनम शर्मा, मेयर - उम्र 52 वर्ष - लॉ ग्रेजुएट - पेशे से वकील - 2012 में वार्ड नंबर-7 में हुए उपचुनाव में जीतकर पार्षद बनीं - जिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष
सतीश कैंथ, सीनियर डिप्टी - उम्र 43 वर्ष - बारहवीं तक पढ़ाई की - पेशे से ट्रांसपोर्टर हैं - वार्ड नंबर-20 से मौजूदा पार्षद
गुरबख्श रावत - उम्र 34 वर्ष - एमएससी(कंप्यूटर साइंस) - पेशे से आईटी प्रोफेशनल - वार्ड नंबर-9 से चुनाव जीतीं
यह है मेयर चुनाव प्रक्रिया
पद: मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए चुनाव होता है। प्रक्रिया: जनता के चुने हुए और निर्वाचित पार्षद तथा सांसद वोट डाल कर चुनते हैं। जनता द्वारा निर्वाचित पार्षद ही उक्त तीनों पदों के लिए चुनाव लड़ सकते हैं। इस समय जनता द्वारा चुने गए 25 पार्षद हैं और 9 मनोनीत हैं। कार्यकाल: मेयर का कार्यकाल एक साल का होता है। नगर निगम के चुनाव हर पांच साल बाद होते हैं।
आरक्षण नगर निगम के पांच साल के कार्यकाल में पहले और चौथे साल का मेयर का पद महिला पार्षद के लिए आरक्षित होता है। दूसरे वर्ष और पांचवें वर्ष का कार्यकाल जनरल, तीसरे वर्ष का अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होता है।
जानिए कुछ अन्य खास बातें
1. कौन बनता है मेयर? नगर निगम चुनाव में चुने पार्षदों में से किसी एक को हर साल मेयर चुना जाता है। 2. क्या पावर्स हैं मेयर की? मेयर शहर का पहला नागरिक होता है। नगर निगम के सभी एजेंडे मेयर की मंजूरी के बाद ही सदन में रखे जाते हैं। 3. मेयर के पास क्या वित्तीय शक्तियां हैं? शहर के विकास के लिए मेयर को दो करोड़ रुपये की राशि मिलती है। इस राशि को मेयर अपने वार्ड को छोड़कर पूरे शहर में कहीं भी खर्च कर सकता है। 4. क्या मेयर को वेतन मिलता है? मेयर को हर महीने 30 हजार रुपये वेतन मिलता है। 5. मेयर को और क्या सुविधाएं मिलती हैं? मेयर को लाल बत्ती वाली गाड़ी के साथ सेक्टर-24 में एक मेयर हाउस भी मिलता है। हालांकि ज्यादातर मेयर वहां शिफ्ट नहीं होते। 6. मेयर का कार्यकाल कितना होता है? देश के सभी केंद्रशासित प्रदेशों में मेयर का कार्यकाल एक साल का ही होता है। 2005 में तत्कालीन मनोनीत पार्षद केएस राजू की अध्यक्षता में गठित एक लीगल कमेटी ने मेयर का कार्यकाल ढाई वर्ष करने का प्रस्ताव तैयार किया था। 2006 में यह प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय भेजा गया, जिस पर अभी तक कुछ नहीं हुआ। 7. पड़ोसी राज्यों में मेयर का कार्यकाल कितना है? पंजाब और हरियाणा में मेयर का कार्यकाल पांच-पांच वर्ष का है। हिमाचल प्रदेश में मेयर का कार्यकाल ढाई वर्ष है।