चंडीगढ़। मेयर चुनाव में बहुमत के बावजूद हार और अल्पमत के बाद भी भाजपा की जीत पर विपक्ष ने खूब हंगामा किया। आप-कांग्रेस गठबंधन ने पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह पर खेल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने खुद आठों मतपत्रों पर पेन से मार्क लगाकर उन्हें अमान्य करार दे दिया। विपक्ष ने यह आरोप भी लगाया कि वोटों की गिनती भी पोलिंग एजेंटों के सामने नहीं की गई और न ही उन्हें मततत्र दिखाए गए। उधर, अमर उजाला से बातचीत में अनिल मसीह ने सभी आरोपों को झूठा करार देते हुए कहा कि उन्होंने नियमों के मुताबिक निष्पक्ष चुनाव कराया है। आप व कांग्रेस के पार्षदों ने बूथ कैप्चरिंग की तरह ही बैलेट पेपर छीनने और फाड़ने की कोशिश की। बता दें कि इस बार का मेयर चुनाव हर बार से अलग रहा। चुनाव न तो मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम के अनुसार हुआ और न ही मीडिया को भी प्रवेश की अनुमति दी गई। मीडिया ने भी सिर्फ वही देखा, जो निगम के कैमरों ने दिखाया। पहली बार चुनाव के दौरान सदन के अंदर 20 मार्शल खड़े रहे।
मेयर चुनाव के लिए निगम कार्यालय को मंगलवार सुबह से ही पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। पुलिस के साथ स्पेशल फोर्स और आईटीबीपी के जवानों की तैनाती थी। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, मतदान सुबह 10 बजे से होना था। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के सभी पार्षद दस बजे तक सदन पहुंच गए लेकिन भाजपा के पार्षद और पीठासीन अधिकारी करीब आधा घंटा लेट पहुंचे। इस वजह से मेयर पद के लिए मतदान प्रक्रिया 11 बजे के बाद शुरू हुई।
डीसी विनय प्रताप सिंह और संयुक्त आयुक्त ईशा कंबोज ने पार्षदों को चुनाव की प्रक्रिया समझाई और डेमो भी दिया। 11.13 बजे पहला वोट सांसद किरण खेर ने डाला। इसके बाद वार्डवार कुल 35 वोट डाले गए। मतदान शांतिपूर्ण तरीके से हुआ लेकिन मतदान के बाद अचानक पीठासीन अधिकारी ने पोलिंग एजेंट के सामने मतगणना करने से इंकार कर दिया गया। इस पर कांग्रेस की पार्षद गुरबख्श रावत और आप के योगेश ढींगरा ने सवाल उठाया लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
पार्षद योगेश ढींगरा ने कहा कि हर बार जब मेयर के लिए मतदान हो जाता है तो पीठासीन अधिकारी की तरफ से दोनों पार्टियों के काउंटिंग एजेंटों को बुलाया जाता है। पिछले दो चुनाव में वह खुद एजेंट रहे हैं। इस बार भी उन्होंने मांग की लेकिन पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह ने कहा कि वह खुद बैलेट बॉक्स खोलेंगे और बैलेट पेपर की जांच कर हस्ताक्षर करेंगे, इसके बाद काउंटिंग एजेंटों को बुलाएंगे। ढींगरा ने आरोप लगाया कि उन्हें नहीं बुलाया गया जबकि हर बार एजेंट को बैलेट पेपर दिखाया जाता है फिर हस्ताक्षर होते हैं। अगर किसी वोट पर शक होता है तो काउंटिंग एजेंट व पीठासीन अधिकारी मिलकर क्लियर करते हैं लेकिन इस बार तो जो अमान्य वोट थे, उन्हें दिखाया भी नहीं गया और न ही बताया गया कि वोट अमान्य क्यों करार दिए गए। सिर्फ इतना बताया गया कि आठ वोट अमान्य हैं। काउंटिंग एजेंट को बुलाए बिना ही मेयर के नाम की घोषणा कर दी।
गठबंधन के कई पार्षदों ने वोट से पहले बदले मतपत्र
गठबंधन के पार्षद राम चंदर यादव, सुमन देवी, तरुणा मेहता, योगेश ढींगरा समेत कई पार्षदों ने वोट देने से पहले बैलेट पेपर को चेक किया और गड़बड़ी के शक में उन्हें बदलवा दिया। पार्षद योगेश ढींगरा ने आरोप लगाया कि कई स्तर पर गड़बड़ी की कोशिश की गई। वोट डालने से पहले चार बैलेट पेपर बदलवाए क्योंकि दो पेपर पहले से ही उल्टे मुड़े हुए थे तो एक पर नीला और एक पर गुलाबी रंग लगा हुआ था। पांचवा पेपर साफ था, जिस पर उन्होंने वोट दिया। बता दें कि चुनाव से पहले संयुक्त आयुक्त की तरफ से पार्षदों को डेमो भी दिखाया गया था कि वोट कैसे डालना है लेकिन फिर भी विपक्ष के आठ वोट अयोग्य करार दे दिए गए।
अनिल मसीह के कांपते रहे हाथ
बैलेट पेपर की गिनती के दौरान कई बार पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह के हाथ कांपते नजर आए। कई बार वह संशय में भी नजर आए। एक बार उन्होंने कुलदीप कुमार टीटा के पक्ष में किए वोट को मनोज सोनकर के खाते में डाल दिया था। जब उन्हें बताया गया तो फिर उन्होंने बैलेट पेपर को कुलदीप कुमार के खाते में डाला। इसके अलावा भी पानी उठाते समय, साइन करते व वोटों की गिनती के दौरान उनके हाथ कांपते हुए नजर आए। कांग्रेस के पार्षद गुरप्रीत गाबी ने आरोप लगाते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति गलत कर रहा होता है, उसके हाथ कांपते हैं। अनिल मसीह को पता था कि वो गलत कर रहे हैं, इसलिए उनके हाथ कांपते रहे।
सड़क पर बैठे पार्षद, रो पड़े कुलदीप कुमार
सदन से वॉकआउट के बाद आप और कांग्रेस के पार्षदों ने पहले मेयर ऑफिस के पास धरना दिया और नारेबाजी की। इस दौरान गठबंधन के मेयर उम्मीदवार कुलदीप कुमार रो पड़े। उन्हें पार्षद प्रेम लता ने चुप कराया। कुलदीप ने कहा कि उन्होंने जीवन में इतनी निम्न स्तर की राजनीति नहीं देखी। कुलदीप ने कहा कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए इस स्तर तक जा सकती है, ये नहीं सोचा था। इसके बाद सभी पार्षद नगर निगम से बाहर आए और पोस्ट ऑफिस के पास भी सड़क पर बैठकर भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की।
पीठासीन अधिकारी अनील मसीह से सवाल-जवाब
सवाल : मेयर चुनाव में काफी हंगामा हुआ। आप पर कई तरह के आरोप लग रहे हैं?
जवाब : मैंने चुनाव अच्छे से शुरू कराया था। सभी का स्वागत किया और मतदान भी नियमों के अनुसार कराया। भाजपा को 16 वोट मिले और गठबंधन को 12 वोट मिले। 8 वोट अमान्य करार दिए गए। आम आदमी पार्टी के मन्नौर व प्रेमलता और कांग्रेस के कुछ पार्षदों ने बूथ कैपचरिंग की तरह ही बैलेट पेपर छीनने और फाड़ने की कोशिश की। कुछ फट भी गए हैं।
सवाल : किस कारण से विपक्ष के आठ वोट अमान्य करार दिए गए?
जवाब : नियमों के अनुसार किसी भी बैलेट पेपर पर कोई मार्क नहीं होना चाहिए। मतों की गणना में पाया गया कि आठ बैलेट पेपर पर कुछ मार्क थे। इसके बाद ही उन्हें अमान्य करार दिया गया।
सवाल : आरोप हैं कि आपने हस्ताक्षर करते हुए कुछ बैलेट पेपर पर निशान लगाए?
जवाब : ये आरोप सरासर झूठा है। मैं तो नियमों के अनुसार ही बैलेट पेपरों पर हस्ताक्षर कर रहा था। अगर किसी पार्षद को आपत्ति थी तो वह आते और चेक करते लेकिन वह लोग तो हंगामा करने में लगे थे। वीडियो में दिख रहा है कि आप-कांग्रेस ने चुनाव को डीरेल करने की साजिश रची।
सवाल : काउंटिंग एजेंट को नहीं बुलाया गया, क्या चुनाव निष्पक्षता से हुआ है?
जवाब : बिल्कुल हुआ है। 11 पार्षदों ने वोट डालने से पहले बैलेट पेपर बदलने की मांग की थी, मैंने सभी के बैलेट पेपर बदले हैं। अब कई तरह की बयानबाजी की जा रही है। लोकतंत्र में यह जायज है।