मेयर चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है, लेकिन अभी तक समीकरण किसी खास के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं। हर उम्मीदवार अपनी तरफ से पूरी कोशिशें करने में लगा हुआ है।
एक जनवरी को चुनाव होने हैं और संभावित उम्मीदवार अभी से मनोनीत पार्षदों को मनाने में लगे हुए हैं। मनोनीत पार्षदों पर ही मेयर की कुर्सी टिकी है और उनका वोट सबके लिए महत्वपूर्ण है। अभी तक पिछले छह सालों से मेयर की कुर्सी कांग्रेस के पाले में ही गई है।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष संजय टंडन ने कहा कि इस बार बदलाव की पूरी उम्मीद है और मनोनीत पार्षद भी नाम से नहीं बल्कि उम्मीदवार के काम को देखते हुए अपने मत का प्रयोग करेंगे।
निगम में 9 मनोनीत पार्षद हैं और इन्हीं का वोट किंग मेकर साबित होता है। इस बार मेयर पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।
भाजपा के पास तो एकमात्र उम्मीदवार है राजिंद्र कौर रत्तू, लेकिन कांग्रेस के पास तीन नाम हैं हरफूलचंद कल्याण,सतीश कैंथ और शीला देवी। इनमें से कैंथ और कल्याण में कांटे की टक्कर है।
कैंथ के लिए डिप्टी मेयर का पद बन सकता है रुकावट
कांग्रेस के मेयर पद के उम्मीदवार और डिप्टी मेयर सतीश कैंथ अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन चर्चा यह चल रही है कि उनका पत्ता शायद कट जाए।
इसकी वजह है उनकी डिप्टी मेयर की कुर्सी। कैंथ दो सालों से डिप्टी मेयर बने हैं। लिहाजा उनकी संभावनाएं कम होती दिख रही हैं। वहीं कल्याण को मौका मिलने पर काफी चर्चाएं हो रही हैं।