एक मई यानी आज विश्व मजदूर दिवस है। आज कुछ मजदूर अपने हक के लिए रैली निकालेंगे तो कुछ नेता मजदूरों के लिए भाषणबाजी करेंगे। इससे मजदूरों की दशा में कुछ सुधार होगा या नहीं, लेकिन चंडीगढ़ के कुछ मजदूर अपनी तकदीर अपने हाथों से लिख रहे हैं। मजदूरी के साथ कोई इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है तो कोई अपनी बेटी को जज बनाने का सपना संजोए हुए है।
ऐसे कुछ किरदार चंडीगढ़ में बुने जा रहे हैं, जो हमारे आसपास बिखरे थे। यह एक कोशिश है सपने देखने और उन्हें पूरा करने की। कोई दूसरा होता तो शायद कब का बिखर जाता। मजदूर दिवस पर ऐसी ही कुछ मिसालें आपके सामने लाने की एक कोशिश है। पेश है आशीष वर्मा की रिपोर्ट।
क्यों मनाया जाता है मजदूर दिवस
अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस की शुरुआत 1886 में शिकागो में उस समय शुरू हुई थी, जब मजदूर मांग कर रहे थे कि काम की अवधि आठ घंटे हो और सप्ताह में एक दिन की छुट्टी हो। इस ह?ताल के दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने बम फोड़ दिया और बाद में पुलिस फायरिंग में कुछ मजदूरों की मौत हो गई, साथ ही कुछ पुलिस अफसर भी मारे गए।
इसके बाद 1889 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय महासभा की द्वितीय बैठक में जब फ्रेंच क्त्रसंति को याद करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया कि इसको अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाए, उसी वक्त से दुनिया के 80 देशों में मई दिवस को राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाया जाने लगा।
चंडीगढ़ के मजदूरों की कथा
चंडीगढ़ में करीब एक लाख 30 हजार वार्किंग क्लास फैमिली
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1. चंडीगढ़ में करीब एक लाख 30 हजार वार्किंग क्लास फैमिली रहती हैं। इसमें कांट्रैक्ट वर्कर, भवन निर्माण में जुटे कर्मचारी, वुमन वर्कर, फैक्टरी वर्कर, मार्बल मार्केट के वर्कर, सेल्स मैन, कैटरिंग काम में जुटे कर्मचारी सहित अन्य कर्मचारी शामिल हैं।
2.कंस्ट्रक्शन वर्कर वेलफेयर बोर्ड की ओर भवन निर्माण में जुटे मजदूरों को बेटी की शादी के लिए पहले 31 हजार रुपये मिलते थे, लेकिन अब सिर्फ 51 सौ रुपये मिलते हैं।
3. बुढ़ापा पेंशन के लिए मजदूरों को एक हजार रुपये मिलते थे, लेकिन अब उसे कम कर 250 रुपये कर दिया गया है।
4. एक्सीडेंट होने पर प्रशासन की ओर से मजदूरों को कोई मदद नहीं दी जाती।
5. दिहाड़ीदार मजदूरों को चार महीने कोई काम नहीं मिलता। उनको मजदूरी व काम देने के लिए कई बार प्रशासन को लिखा जा चुका है।
6. दिहाड़ीदार मजदूरों को कोई छुट्टी नहीं मिलती। छुट्टी की मांग भी पेंडिंग है।
7. महिला कर्मचारियों को प्रसव अवकाश नहीं मिलता। यदि वे गर्भवती हुई तो उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ती है।
8. मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी नहीं मिलती। खासकर पीजीआई के पार्किंग में लगे कर्मचारी।
9. जॉब व सोशल सिक्योरिटी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
10.यदि किसी मजदूर को घर बनाना हो तो उसके लिए चंडीगढ़ प्रशासन उन्हें 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक बिना ब्याज के लोन देता है। मजदूर उसे 500 रुपये प्रति महीने की किस्त से अदा कर सकता है।
11. यदि कोई मजदूर साइकिल खरीदना चाहता है तो प्रशासन उसे दो हजार रुपये का लोन देता है। बाद में मजदूर 200 रुपये प्रति महीने के हिसाब से किस्त दे सकता है।