महिला अनीमिया के इलाज के लिए मई 2020 में बठिंडा के सिविल अस्पताल में भर्ती हुई थी। इस दौरान उसे खून चढ़ाया गया और इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। मई में ही इस बात की जानकारी ब्लड बैंक को मिल गई थी कि खून संक्रमित था लेकिन उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं दी गई।
अनीमिया के इलाज के लिए बठिंडा के अस्पताल में भर्ती महिला को एचआईवी पॉजिटिव खून चढ़ाने का मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। आरोपी एसएमओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार, बठिंडा के एसएसपी और स्थानीय एसएचओ को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
याचिका दाखिल करते हुए पीड़ित महिला ने हाईकोर्ट को बताया कि वह अनीमिया के इलाज के लिए मई 2020 में बठिंडा के सिविल अस्पताल में भर्ती हुई थी। इस दौरान उसे खून चढ़ाया गया और इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। मई में ही इस बात की जानकारी ब्लड बैंक को मिल गई थी कि खून संक्रमित था लेकिन उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं दी गई। अक्तूबर 2020 को डॉक्टरों की टीम की तरफ से जांच रिपोर्ट एसएमओ डॉ. मनिंदर सिंह को दी गई, लेकिन उन्होंने याची को खोजने का प्रयास नहीं किया।
अगस्त 2021 में याची को खोजा गया और जांच में पाया गया कि उसके साथ ही उसका पति और उसकी बेटी भी संक्रमित हो चुकी थी। इसके बाद उन्हें नियमित इलाज के लिए भर्ती कर लिया गया। याची ने कहा कि डॉक्टरों की गलती के कारण उनके परिवार की जिंदगी खराब हो गई है। इस मामले में पुलिस ने केवल सीनियर मेडिकल टेक्नीशियन बलदेव सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया है जबकि एसएमओ मनिंदर सिंह के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया गया है। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।