पंचकूला चंडीगढ़ मार्ग के बाद अब चंडीगढ़ मोहाली सीमा पर कौमी इंसाफ मोर्चा द्वारा पक्के मोर्चे बनाने का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। जस्टिस ए जी मसीह व जस्टिस गुरबीर सिंह की खंडपीठ ने इस मामले में अब पंजाब सरकार सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।
अराइव सेफ सोसाइटी चंडीगढ़ के अध्यक्ष हरमन सिंह सिद्धू ने जनहित याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि सिख बंदियों को छुड़ाने की मांग को लेकर सात जनवरी से मोहाली में पक्के मोर्चे लगाए जा रहे हैं। याचिका में अपील की गई कि सरकार को आदेश दिया जाए कि वाईपीएस चौक, फेज 7, फेज 3ए, मोहाली में प्रदर्शनकारियों द्वारा किए गए अतिक्रमण को जल्द हटाया जाए। इस मोर्चे से आम लोगों को वहां से गुजरने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है और लोगों की जान-माल व स्वतंत्रता की सुरक्षा की जाए। कौमी इंसाफ मोर्चा से जुड़े सदस्य कानून व्यवस्था खराब कर सकते हैं और शांति व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। इससे ट्रैफिक जाम की स्थिति और राइट टू फ्री मूवमेंट भी प्रभावित हो रही है।
जनहित याचिका में इस प्रदर्शन की तस्वीरें भी अटैच की गई हैं। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रतिवादी बनाए गए पुलिस-प्रशासन को उचित आदेश जारी करने की याचिका में मांग की गई है। साथ ही यह भी बताया गया है कि लोग इस प्रदर्शन के कारण सड़कों से नहीं गुजर पा रहे हैं। प्रदर्शनकारी अनिश्चितकाल के लिए प्रदर्शन (मोर्चे) पर बैठे हुए हैं। पिछले तीन महीने से प्रदर्शन पर हैं, जिससे आम नौकरीपेशा व्यक्ति, स्टूडेंट्स और अन्य लोग सड़क से गुजर नहीं पा रहे हैं। बिना किसी कारण अनावश्यक रूप से उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस प्रदर्शन से स्टूडेंट्स की परीक्षाएं भी प्रभावित हो रही हैं। याचिका में भारत सरकार के गृह मंत्रालय, पंजाब सरकार के चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी, पंजाब, डिप्टी कमिश्नर, मोहाली और एसपी, मोहाली को प्रतिवादी बनाया है।