पार्किंग का ठेका लेने के लिए फर्जी बैंक गारंटी देने के मामले में मास्टरमाइंड अनिल शर्मा चंडीगढ़ पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। शर्मा की गिरफ्तारी के साथ ही कई खुलासे होने लगे हैं। आरोपी ने कई शैल कंपनियों के सहारे लोगों और सरकारों से करोड़ों रुपये का घपला किया है। आरोपी पर सिर्फ चंडीगढ़ ही नहीं, दिल्ली के नगर निगम का भी करोड़ों बकाया है। निगम ने शर्मा की सात कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया है। निगम दफ्तर में भी उसके घुसने पर रोक लगाई हुई है।
अनिल शर्मा फिलहाल पुलिस रिमांड में है और आर्थिक अपराध शाखा उससे पार्किंग घोटाले को लेकर पूछताछ कर रही है। सूत्रों के अनुसार अनिल शर्मा की राजनीतिक पहुंच बहुत ऊंची है, जिसके बलबूते पर वह चंडीगढ़, दिल्ली, भोपाल समेत कई शहरों में पार्किंग, आउटडोर पब्लिसिटी होर्डिंग, बैंक्वेट हॉल आदि के ठेके चला रहा था। दिल्ली के लगभग हर हिस्से में उसके पार्किंग के ठेके थे।
वर्ष 2016-17 के दौरान कई गड़बड़ियों के बाद दिल्ली नगर निगम ने आरोपी की सात कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया था और करोड़ों की वसूली भी करनी है। इसके अलावा होटल व रियल एस्टेट का भी उसका बिजनेस है। शर्मा के दिल्ली में भाजपा समेत कई राजनीतिक पार्टियों के बड़े नेताओं से अच्छे संबंध भी हैं। वह भाजपा से दिल्ली के चांदनी चौक जिला का कोषाध्यक्ष भी रह चुका है। पत्नी भी भाजपा महिला मोर्चा में है।
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बताया जा रहा है कि पार्टी ने आरोपी की पत्नी को टिकट भी दी थी, लेकिन बाद में वापस ले ली गई थी। अनिल शर्मा से जुड़े एक व्यक्ति का कहना है कि यदि शर्मा के बिजनेस का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए, तो उसका यह घोटाला सैकड़ों करोड़ का हो सकता है, जिससे अनिल शर्मा ने दिल्ली के विभिन्न इलाकों में अकूत संपत्ति खड़ी की है। फिलहाल चंडीगढ़ पुलिस ने अनिल शर्मा को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
कानून का जानकार, इसलिए चंडीगढ़ में आकर कर दिया आत्मसमर्पण
सूत्रों के अनुसार आरोपी अनिल शर्मा ने चंडीगढ़ जिला अदालत में आत्मसमर्पण किया है। बताया जा रहा है कि पुलिस का शिकंजा कसता देख उसने आत्मसमर्पण का कदम उठाया, जिसके बाद अदालत ने उसे रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस पता लगा रही है कि फर्जी बैंक गारंटी जारी करने में उसकी क्या भूमिका है और अन्य आरोपियों से उसके क्या संबंध है। सूत्रों के अनुसार पता चला है कि आरोपी कई लोगों के नाम ले रहा है, उन्हें पूछताछ के लिए चंडीगढ़ बुलाया जा रहा है। हालांकि चंडीगढ़ पुलिस ने अब तक अनिल शर्मा की गिरफ्तारी की जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। बता दें कि शर्मा ने खुद को वकील भी बताया है।
आरोपी की गिरफ्तारी की सूचना के बाद से दिल्ली के कई नेता और बिजनेसमैन पहुंच रहे चंडीगढ़
आरोपी ने कई नेताओं और बिजनेसमैन से पैसा लिया हुआ है, जिसे उसने अपने पार्किंग के ठेके व अन्य बिजनेस में निवेश किया हुआ है। आरोपी ने सभी को लालच दिया था कि उसके कई बिजनेस हैं और वह सभी को अच्छा रिटर्न देगा। हालांकि अब सामने आए लोगों का कहना है कि उन्हें नहीं पता था कि आरोपी इस तरह के काम करता है। इस संबंध में शनिवार को भी एक बिजनेसमैन ने चंडीगढ़ पुलिस के ईओडब्ल्यू के सामने पेश होकर आरोपी से संबंधित कई तरह की जानकारियां दी हैं। बताया है कि आरोपी ने कई शैल कंपनियां बनाई हुई हैं, उन कंपनियों की सूची भी पुलिस को सौंपी है।
आरोपी के पास ऑडी-मर्सिडीज जैसी कई कारें, अमेरिका में भी होटल
सूत्रों से पता चला है कि आरोपी के पास ऑडी-मर्सिडीज, फॉर्च्यूनर, एंबेसडर जैसी कई गाड़ियां हैं और दिल्ली के पहाड़गंज में तीन होटल समेत दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर कई फ्लैट और अमेरिका में भी एक होटल है। हालांकि वह अपने किसी न किसी कर्मचारी के नाम पर कंपनी रजिस्टर करवा कर इनका संचालन करता है। ऐसी कई कंपनियों की सूची भी पुलिस के हाथ लगी है, जिसकी जांच चल रही है। ये सभी कर्मचारी भी पुलिस के रडार पर है। बता दें कि आरोपी पर चंडीगढ़ नगर निगम का सात करोड़ बकाया है। आरोपी ने पार्किंग का टेंडर लेने के लिए भी फर्जी बैंक गारंटी दी थी। इस मामले में अब तक पाश्चात्य एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर संजय शर्मा, बैंक ऑफिसर रविचंद्र प्रकाश और अजय को गिरफ्तार किया है।
नगर निगम के किन अफसरों की मिलीभगत, इस पर निगम ने साधी चुप्पी
फर्जी बैंक गारंटी के मामले में पुलिस ने पार्किंग कंपनी समेत बैंक के एक कर्मी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन नगर निगम के किन अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत रही, इस पर निगम ने चुप्पी साध ली है। निगम की विभागीय जांच भी चल रही है, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी अब तक उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
नगर निगम ने वर्ष 2020 में शहर की 89 पार्किंगों को दो जोन में बांटकर उन्हें ठेके पर दिया था। जोन एक की 57 पार्किंगों का ठेका पाश्चात्य एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को मिला था। ठेकेदार को हर माह 45 लाख रुपये निगम को देना था। उसने लगभग डेढ़ साल तक रुपये जमा कराए और उसके बाद वह लगातार फीस माफ करने के लिए पत्र लिखता रहा। इस दौरान लाइसेंस फीस, जुर्माना और दोनों का ब्याज मिलाकर लगभग सात करोड़ रुपये का बकाया हो गया। 23 जनवरी 2023 को कंपनी का ठेका समाप्त हो गया। उसके बाद निगम ने बकाया वसूलने के लिए बैंक को पत्र लिखा, तो बैंक की ओर से बताया गया कि उनकी ओर से बैंक गारंटी का कोई सत्यापन पत्र निगम को नहीं दिया गया है। जो निगम के पास बैंक गारंटी है, वो फर्जी है।