पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उस सुझाव को मान लिया है, जिसमें उनसे अपील की गई थी कि स्कूलों में ऐसी व्यवस्था की जाए कि विद्यार्थी अपने क्षेत्र के शहीदों को भी उनके बलिदान दिवस के मौके पर सुबह की प्रार्थना के समय श्रद्धांजलि अर्पित करें। इससे जहां स्कूली विद्यार्थियों में अपने क्षेत्र के वीर सैनिकों के प्रति सम्मान बढ़ेगा और उनमें देशभक्ति बढ़ेगी। वहीं वीरगति को प्राप्त सैनिकों के परिजन भी अपने क्षेत्र के स्कूल में बच्चों द्वारा श्रद्धांजलि दिए जाने से गौरवान्वित महसूस करेंगे।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट एचसी अरोड़ा द्वारा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को भेजे गए उक्त सुझाव की सराहना करते हुए कैप्टन ने मुख्य सचिव को इस दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। एडवोकेट अरोड़ा ने 28 दिसंबर, 2018 को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि सीमा पर अपने देश की रक्षा करने वाले पंजाब के जवानों को उनके शहीदी दिवस पर याद किया जाना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि पंजाब के इन सैनिकों से संबंधित वस्तुएं उनके पैतृक गांव में स्कूल में संग्रहित की जाएं ताकि स्कूली बच्चे उनसे प्रेरणा ले सकें। उन्होंने लिखा कि संबंधित शहीद सैनिक का शहीदी दिवस उनके पैतृक गांव के स्कूल में मनाया जाए। शहीद के परिवार को इस अवसर पर आमंत्रित किया जाना चाहिए, ताकि वे महसूस कर सकें कि उनके बेटे का बलिदान बेकार नहीं गया है।
ऐसे शहीदों की विधवाओं को भी गर्व की अनुभूति होनी चाहिए कि देश उनके पति के बलिदान को महत्व देता है। उन्होंने लिखा कि इस बारे में शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी पता लगाने के लिए कहा जाए कि किस गांव का कौन सा जवान शहीद हुआ है। यह सारी जानकारी जुटाने के बाद स्कूलों में इस तरह के समारोह कराए जाएं।