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जब अर्जन सिंह बोले- मुझे गर्व है मैं सिख हूं और देश के लिए लड़ा

Sun, 17 Sep 2017 12:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
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Arjan Singh passes away
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2016 में नारायणगढ़ में शहीदों के यादगार स्मारक के शुभारंभ में आए चीफ मार्शल अर्जन सिंह से एक बच्चे ने सवाल पूछा था कि मैं भी आपकी तरह बड़ा अफसर बनना चाहता हूं, क्या करूं। तब चीफ मार्शल ने कहा था कि बस निशाना आंख पर होना चाहिए, लगन, मेहनत और ईमानदारी हर मंजिल दिला देती है।
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दुनिया भर में अपने इरादों का लोहा मनवाने वाले देश के पहले चीफ मार्शल अर्जुन सिंह का परिवार बंटवारे में बंटकर सीमा पार से आया था। यह जानकारी खुद उन्होंने 23 अक्तूबर 2016 को तब दी थी जब तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने नारायणगढ़ में युद्ध स्मारक और संग्रहालय को पंजाब स्टेट वार हीरोज मेमोरियल और म्यूजियम के शुभारंभ में उन्हें खास तौर पर आमंत्रित किया था। 

युद्ध स्मारक में 130 फुट ऊंची और 54 टन भारी तलवार को देखने के बाद 3500 शहीदों के नाम पढ़ते हुए अर्जन सिंह की आंखें नम हो गई थी। उन्होंने कहा था युद्ध में केवल एक ही मकसद होता है भारत मां की रक्षा में कुर्बान होना, मुझे गर्व है कि मैं सिख हूं और मैं देश के लिए सिपाही बनकर दुश्मनों से लड़ा।  
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Arjan Singh passes away - फोटो : File Photo
लायलपुर में जन्म लेने वाले अर्जन सिंह का परिवार अमृतसर के एक गांव में कुछ दिनों तक रहा, अब यह जिला तरनतारन में आता है। इतिहासकार सुरेंद्र कोछड़ कहते हैं कि चीफ मार्शल अर्जन सिंह की एक चिट्ठी उनके पास है, जिनमें उनके गांव का जिक्र है। पुरानी बात है, गांव याद नहीं आ रहा लेकिन वह गांव तरनतारन जिले में पड़ता है।  

पूर्व सेहत मंत्री प्रोफेसर लक्ष्मीकांता चावला कहती हैं कि बात 1967 की है, मैं शिक्षिका थी। मुझे याद है कि चीफ मार्शल अर्जन सिंह जब आए तो उनके सम्मान में बारह स्कूलों के बच्चों ने सलामी देते हुए भारतीय सेना जिंदाबाद के नारे लगाए थे। उनके गले में नारियल पिरोकर माला डाली गई थी। मैंने उनकी कलाई पर मौली बांधी थी।  
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