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एक इलाका ऐसा, जहां पानी की किल्लत, कुंवारों को जिल्लत

Mon, 18 Apr 2016 04:04 PM IST
प्रेम सारस्वत/अमर उजाला, सिवानी मंडी(भिवानी)
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हरियाणा के सिवानी मंडी में महारष्ट्र की तरह सूखा - फोटो : फाइल फोटो
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महाराष्ट्र की तरह हरियाणा का भी एक इलाका ऐसा है, जहां पानी की किल्लत कुंआरे लड़कों के लिए अभिशाप बन गई है। रिश्ते वाले आते हैं लेकिन क्षेत्र के भयावह हालातों के कारण घोड़ी पर चढ़ने के इलाके के लड़कों के अरमानों पर पानी फिर जाता है। ग्रामीणों की मानें तो रिश्ता करवाने के लिए लड़की वालों की शादी के बाद दोनों को शहर में मकान दिलवाने की शर्त पूरी करनी पड़ती है। जो सक्षम हैं वे तो इस शर्त को पूरी कर देते हैं, लेकिन जो सक्षम नहीं है उन्हें मन मसोस कर ही रहना पड़ता है।
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गौरतलब है कि सिवानी क्षेत्र में वर्ष 2002 से पड़ रहे सूखे ने इस इलाके की हरियाली ही छीन ली है। इससे न केवल किसान आर्थिक रूप से कमजोर हो रहे हैं, बल्कि गांव में कुंआरे लड़कों का रिश्तों पर इसका पूरा प्रभाव पड़ने लगा है। रिश्ता करने से पहले इस इलाके की हालात और यहां महिलाओं की दुर्दशा को देख लोग यहां रिश्ता करने से कतराने लगे हैं। राज्य के अंतिम छोर पर बसे इस उपमंडल में भूमिगत पानी खारा होने के कारण यहां के लोग पूरी तरह से नहरी पानी पर निर्भर हैं।

नहरें टेल पर होने के कारण अधिकांश गांवों में पानी खेतों में सिंचाई के लिए तो दूर की बात हैं, पीने तक के लिए नहीं पहुंच पाता है। मीठे पानी के लिए संपन्न लोग तो टैंकरों के माध्यम से एक हजार रुपये खर्च करके अपना काम चला लेते हैं, लेकिन जो लोग पानी खरीद नहीं पाते उन्हें खारा पानी भी कोसों दूर से लाना पड़ता है। इसकी जिम्मेदारी भी घर में महिलाओं की होती है, जिसके कारण पेयजल संकट रिश्तों पर भी भारी पड़ रहा है।
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हरियाणा के इन इलाकों में यहां हालात सबसे खराब

शादीशुदा होने के बावजूद इसने खुद को अविवाहित बताया और एक युवक से शादी कर ली। फिर लाखों के गहने लेकर फरार हो गई।
गांव लीलस, सैनीवास, ढाणी सिलांवाली, देवसर, गुरेरा, गैंडावास, घंघाला, बुद्धशैली, नलोई, मिठ्ठी, मोरकां, मतानी, ढाणी भाखरा, बख्तावरपुरा, मोतीपुरा आदि गांवों में हालात भयंकर बने हुए हैं। इन गांवों में हालात ये है कि लोग जलघरों में बचे गाद के गंदे पानी तक को पीने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

यह परेशानी की बयां
गांव मोरकां की महिला सुदेश बोलीं कि साहब हमारे गांव में पानी और सूखे के कारण तो रिश्ते होने भी बंद हो गए हैं। हालात ये हैं कि घरवालों पर महिलाएं शहर में शिफ्ट होने का दबाव बनाने लगी हैं। रामचंद्र फौजी बताते हैं कि गांवों के हालात देखने के बाद रिश्ते वालों की कंडीशन होती है कि शादी के बाद लड़का-लड़की गांव में नहीं बल्कि शहर में रहेंगे।

नहर आने के बाद ही होगा समाधान - एसडीओ
जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ श्रीभगवान शर्मा ने कहा कि विभाग की तरफ से उनके पास उपलब्ध पानी टैंकरों के माध्यम से भिजवाया जा रहा है। अब अगर वह खारा है तो सरपंचों को बोल दिया गया है कि जहां से भी उन्हें मीठा पानी उपलब्ध होता है मंगवा लें, विभाग की तरफ से उसका भुगतान करवा दिया जाएगा। नहर आने के बाद ही गांवों में पेयजल किल्लत से लोगों को निजात मिलेगी।
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