प्रशासन ने सब्जियों और फलों पर मार्केट फीस खत्म करने का निर्णय लिया है। वहीं लोगों का कहना है कि प्रशासन को प्रतिदिन मार्केट के हिसाब से सब्जियों और फलों के रिटेल रेट तय करने चाहिए और इसी रेट पर ही पूरे शहर में सब्जियां और फल ग्राहकों को मिलें। क्योंकि विक्रेता अपनी मर्जी से इलाके के हिसाब से रेट तय कर लेता है।
वहीं मार्केट कमेटी के निदेशक का कहना है कि मार्केट फीस खत्म करने से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह फीस होलसेल के कारोबार में चार्ज की जाती है और आढ़ती जमींदार से आगे विक्रेता को सब्जी और फल बेचता है। साथ ही रिटेल रेट तय करने का अधिकार मार्केट कमेटी को होना चाहिए।
हर किसी को मिलेगा कारोबार का अधिकार
इस समय मंडी में उन आढ़तियों को ही कारोबार करने का अधिकार है जिनके पास लाइसेंस है। मार्केट कमेटी आढ़तियों से लाइसेंस फीस चार्ज करता है, लेकिन दो प्रतिशत फीस खत्म हो जाने से हर किसी नए व्यापारी को भी कारोबार करने का अधिकार मिल जाएगा।
ग्राहक तक पहुंचने तक दोगुना हो जाते हैं दाम
मार्केट कमेटी के अनुसार होलसेल रेट पर तो उनका कंट्रोल होता है, लेकिन होलसेल के बाद ग्राहक तक पहुंचते हुए जो रेट तय होते हैं वह डेढ़ से दो गुना बढ़ जाते हैं।
रविवार को भिंडी का मंडी में होलसेल रेट 18 रुपये था, जो कि बाजार में 40 रुपये किलो बिकी। वहीं टमाटर जिसका होलसेल रेट 22 से 25 रुपये किलो था, बाजार में वह ग्राहकों को 40 से 50 रुपये किलो में मिला।
कोट
सब्जी और फलों की बिक्री पर राष्ट्रीय नीति बननी चाहिए। मार्केट फीस खत्म करने से कुछ ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, इतना जरूर है कि अधिकारियों की तानाशाही समाप्त हो जाएगी।
-दिग्विजय कपूर, अध्यक्ष आढ़ती एसोसिएशन
अगर प्रशासन वाकई चाहता है कि महंगाई कम करे तो सब्जी और फलों के रेट खुद तय करे। क्योंकि रिटेल के रेट ही अगर विक्रेता ज्यादा तय करेगा तो ग्राहक को किस तरह से राहत मिलेगी। ऐसे विक्रेताओं पर कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए, जो होलसेल के मुकाबले दोगुने रेट पर सब्जी बेचते हैं।
-सुरेंद्र शर्मा, प्रेस सचिव फासवेक
फीस खत्म करना अच्छा कदम है, लेकिन मंडी के विकास के लिए प्रशासन को नए साधन भी उपलब्ध करवाने होंगे। प्रशासन अगर मंजूरी दे तो कमेटी परचून के रेट तय करने के लिए तैयार है।
- जुझारू सिंह, निदेशक मार्केट कमेटी