प्रवक्ता ने बताया कि इस ड्रोन की बरामदगी के बाद शुरू की गई कड़ी चौकसी के चलते पुलिस ने आकाशदीप सिंह, बाबा बलवंत सिंह, हरभान सिंह और बलबीर सिंह उर्फ बिंदा को गिरफ्तार किया। इसके बाद शुभदीप सिंह को हथियारों की एक बड़ी खेप का निपटारा करने के मामले में गिरफ्तार किया गया। इन लोगों से पूछताछ के तीन दिन बाद तरनतारन में दूसरे आधे जले हुए ड्रोन की बरामदगी हुई।
आकाशदीप ने खुलासा किया कि सितंबर की शुरुआत के आसपास आधे जले हुए ड्रोन पर दो 9 एमएम पिस्तौल की तस्करी की गई थी। सीमा के पास हथियार छोड़ने के बाद पाकिस्तान वापस उड़ान भरने से पहले ही यह ड्रोन भारतीय क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।
नाली में फेंक दिया था अधजले ड्रोन का फ्रेम
प्रवक्ता ने खुलासा किया कि पाकिस्तान स्थित खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (केजेडएफ) के प्रमुख रणजीत सिंह उर्फ नीटा और उसके सहयोगी गुरमीत बग्गा ने आकाशदीप और उसके साथियों को ड्रोन के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना दी थी। उन्होंने आकाशदीप को ड्रोन को नष्ट करने का निर्देश भी दिया ताकि पुलिस को इसके बारे में पता न चले। इसके बाद आकाशदीप और उनके सहयोगियों ने ड्रोन को जला दिया और एक नाली में ड्रोन के स्टील फ्रेम का फेंक दिया।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा
प्रवक्ता ने बताया कि संबंधित एजेंसियों द्वारा विस्तृत तकनीकी जांच के लिए केंद्र सरकार के साथ ड्रोन का ब्योरा तुरंत साझा किया गया था। राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय तक इस बड़े आकार के ड्रोन के आवागमन पर चिंता व्यक्त की है। केंद्र से यह भी कहा गया है कि खालिस्तानी आतंकवादी संगठनों द्वारा ऐसी क्षमता और कौशल हासिल कर लेना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।