सर्वे के लिए चुने गए 1000 मतदाताओं में से 93.3 प्रतिशत ने लोकसभा चुनाव-2019 में मतदान किया था। इसमें 90.5 प्रतिशत ने कहा कि वोट देना उनका अधिकार है जबकि 4.6 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा कि उन्होंने वोट सिर्फ इसलिए दिया, क्योंकि उन्हें वोटर स्लिप मिल गई थी और पोलिंग बूथ उनके घर के पास था जबकि 1.8 प्रतिशत लोग चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए अभियानों से प्रभावित होकर वोट देने पहुंचे थे।
सर्वे में 88.7 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें पोलिंग स्टेशन पर लंबी लाइन की वजह से काफी परेशानी हुई। 25.8 प्रतिशत ने कहा कि बूथ पर पीने का पानी, शौचालय और रैंप की व्यवस्था नहीं होने की वजह से परेशानी हुई जबकि करीब 2.1 प्रतिशत लोगों ने यह भी कहा कि उन्हें पोलिंग स्टेशन पर राजनीतिक दलों के बूथ ऑपरेटर द्वारा धमकाया गया।
68.3 प्रतिशत मतदाता बोले- अखबार और टीवी से मिली चुनाव से संबंधित जानकारी
सर्वे में एक और हैरान करने वाली बात सामने आई कि वोट देने पहुंचे 53.8 प्रतिशत लोगों को चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के बारे में ज्यादा जानकारी ही नहीं थी, जबकि 30 प्रतिशत लोगों को उम्मीदवार के बारे में तब पता चला, जब वह वोट देने मतदान केंद्र पहुंचे थे और उन्होंने ईवीएम पर प्रत्याशी की फोटो देखी।
12.9 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने उम्मीदवार के बारे में पढ़ा और सुना था। सिर्फ 3.3 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा कि चुनाव के दौरान चलाए गए अभियानों व रैलियों से उन्हें उम्मीदवार के बारे में पता चला था। सर्वे में यह बात सामने आई कि चुनाव के दौरान जागरूकता फैलाने में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का काफी अहम रोल रहा है।
68.3 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें चुनाव से संबंधित जानकारी अखबार और टीवी के माध्यम से मिली। चुनाव आयोग की तरफ से जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर 1950 से संबंधित पूछे गए सवाल पर करीब 96 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने एक बार भी इस हेल्पलाइन नंबर पर फोन नहीं किया।
27.9 प्रतिशत लोगों ने माना- ईवीएम के नतीजे सही नहीं
सर्वे में 54.5 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें नोटा के बारे में तब जानकारी मिली, जब वह वोट देने पहुंचे थे जबकि 7.6 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें पहले से ही नोटा के बारे में पता था जबकि 37.2 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें वोट देने के बाद भी नोटा के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। सर्वे में जब वीवीपैट मशीन को लेकर लोगों से सवाल पूछे गए तो करीब 49.3 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें वीवीपैट मशीन के बारे में तब पता चला जब वोट देने पहुंचे थे।
42.6 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें पता ही नहीं था कि ईवीएम के साथ वीवीपैट मशीन भी रखी हुई है। वहीं सर्वे में 48.4 प्रतिशत लोगों ने कहा कि चंडीगढ़ में मतदान करना अनिवार्य होना चाहिए, जबकि 45.3 प्रतिशत ने इस बात से इनकार किया। वहीं, 48.4 प्रतिशत लोगों ने माना कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हुए हैं और 17.3 प्रतिशत ने इससे इंकार किया। बाकी लोगों का मिलाजुला जवाब रहा। वहीं, 27.9 प्रतिशत लोगों ने कहा कि ईवीएम के नतीजे सही नहीं थे।