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पड़ताल: चंडीगढ़ में कई नियमित अधिकारी कर्मचारी कुर्सियों पर जमे, स्वास्थ्य विभाग में हर जगह मानक दरकिनार  

Thu, 03 Mar 2022 12:17 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

कर्मचारियों के हित, विकास और सरकारी कामकाज में बेहतरी को ध्यान में रखते हुए 3 साल के बाद स्थानांतरण का मानक बनाया गया है, ताकि दूरस्थ कर्मचारी को गृह राज्य के करीब आने का मौका मिले।
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चंडीगढ़ सेक्टर 16 का सरकारी अस्पताल। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग में डेपुटेशन का जिन्न वापस बोतल में चला गया है, लेकिन डेपुटेशन से भी बड़ा खेल चंडीगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में नियमित पदों पर तैनात डॉक्टरों व कर्मचारियों के स्थानांतरण को लेकर चल रहा है। आलम यह है कि विभाग ने तीन साल में स्थानांतरण के मानक को दरकिनार कर चिकित्सा अधिकारियों व अन्य कर्मचारियों को 20 से 25 साल तक एक ही स्थान पर तैनाती दे रखी है। अधिकारी व कर्मचारी कुर्सी को अपनी व्यक्तिगत संपत्ति मानने लगे हैं। इतना ही नहीं, कुछ का खौफ इस कदर हावी है कि उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद उसी पद पर पुनर्नियोजन के तहत तैनाती दी जा रही है। जीएमएसएच 16, मनीमाजरा सिविल अस्पताल, सेक्टर-19, सिविल डिस्पेंसरी सेक्टर-8, कैंबवाला हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, सेक्टर-45 सिविल अस्पताल, सेक्टर-11 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, सेक्टर-9 यूटी सचिवालय में ऐसे कई उदाहरण हैं।  

खुलेआम चल रहा कुर्सी का रौब

कुर्सी का खेल इस कदर हावी है कि ड्यूटी लगवाने, अवकाश दिलाने, वीआईपी ड्यूटी से मुक्ति और नाइट शिफ्ट से बचाव तक का जुगाड़ इसके बल पर किया जा रहा है। इससे निचले व अनुबंध पर तैनात कर्मचारी बेहद परेशान हैं, क्योंकि कुर्सी पर जमे अधिकारियों व कर्मचारियों के कारण उन नए कर्मचारियों की सुनवाई नहीं हो रही। 

अधिकारी भी हैं मौन

मानकों की अनदेखी पर उच्चाधिकारी भी मौन हैं। सूत्रों का कहना है कि जब कभी स्थानांतरण का जिक्र होता है, अधिकारी व्यवस्था में रुकावट का हवाला देकर उसे टाल देते हैं, जबकि इसकी भी चर्चा है कि एक ही जगह तैनात रहने के लिए अधिकारियों की जी हजूरी भी जमकर की जा रही है। ऐसा होने के कारण ही जीएमएसएच 16 में विभिन्न संवर्गों में तैनात अधिकारी व कर्मचारी 10 से 15 साल से वहीं तैनात हैं, लेकिन उन्हें कहीं और जाने का आदेश जारी नहीं हो पाया है। 

इसलिए जरूरी है स्थानांतरण

कर्मचारियों के हित, विकास और सरकारी कामकाज में बेहतरी को ध्यान में रखते हुए 3 साल के बाद स्थानांतरण का मानक बनाया गया है, ताकि दूरस्थ कर्मचारी को गृह राज्य के करीब आने का मौका मिले। स्थानांतरण के बाद वहां आने वाले नए कर्मचारी को अगली व्यवस्था समझने का मौका मिले और एक स्थान पर जमे कर्मचारियों के कारण आने वाली रुकावटों को हटाने व बेहतर व्यवस्था बनाने में भी सहायक हो। 

इन पदों पर वर्षों से जमे हैं अधिकारी-कर्मचारी 

सीनियर मेडिकल ऑफिसर, असिस्टेंट मेडिकल ऑफिसर, मेडिकल ऑफिसर, फार्मासिस्ट, नर्सिंग ऑफिसर, टेक्निकल स्टाफ, लिपिक के पद पर ऐसे दर्जनों लोग 20 से 25 साल से एक ही जगह तैनाती का आनंद ले रहे हैं। इतना ही नहीं, दर्जनों ने स्थानांतरण से दूर रहकर सेवानिवृत्ति भी प्राप्त कर ली है। 

जनता की भी यही मांग, बदलाव जरूरी 

स्वास्थ्य विभाग में मानकों की अनदेखी बंद होनी चाहिए। इस अनदेखी के कारण ही मरीजों को समुचित चिकित्सकीय सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कम से कम कार्यालयीय कर्मचारियों को तो तीन साल पर स्थानांतरित करना ही चाहिए। -दलबीर सिंह, हल्लोमाजरा 

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हर जगह तो कमीशन का खेल चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग में भी लिपिक, स्टोर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर एक ही कर्मचारी को तैनाती देने की गलती नहीं होनी चाहिए। स्थानांतरण का मानक हर हाल में लागू किया जाना चाहिए।  -मिथिलेश वर्मा, रामदरबार

पिछले दो वर्षों से कोरोना महामारी का दौर चल रहा है। अगर किसी भी स्थापित व्यवस्था को प्रभावित किया गया तो आपातकाल में काफी परेशानी झेलनी पड़ सकती है, जहां तक स्थानांतरण की बात है तो कोरोना समाप्त होते ही इसे लेकर व्यापक स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। -डॉ. सुमन सिंह, निदेशक स्वास्थ्य

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