पोस्टमार्टम होने से पहले तक जिला पुलिस के आला अधिकारी व एसडीएम धर्मकोट नरिंदर सिंह धालीवाल जोबनप्रीत के पिता व ग्रामीणों को भरोसा दे रहे थे कि मामले में जांच की जा रही है। पुलिस कह रही थी कि अज्ञात लोगों के खिलाफ उनके बेटे की हत्या का केस दर्ज कर लिया गया है। मगर न तो कोई केस दर्ज हुआ और न ही इस मामले में परिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत एफआईआर की कापी दी गई।
शनिवार के दिन जब अमर उजाला ने जोबनप्रीत के गांव के सरपंच व उनके गांववासियों से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि पूरे माजरे के बाद यह साफ है कि जोबनप्रीत व गुरचेत का एसटीएफ ने एनकाउंटर किया है। वहीं परिवार समेत गांववासियों में इस बात को लेकर एसटीएफ के प्रति निराशा है कि जोबनप्रीत व गुरचेत इतने बड़े अपराधी या नामी गैंगस्टर नही थे कि पुलिस ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग करके मार दे।
बड़ी खेप के बजाय 48 ग्राम हेरोइन मिली एसटीएफ को
एसटीएफ मोहाली टीम को सूचना थी कि जोबनप्रीत व गुरचेत नशे की बड़ी खेप लेकर मोगा में सप्लाई देने के लिए आ रहें है। घटनाक्रम के बाद जब पुलिस ने उनकी कार की तलाशी ली गई तो 48 ग्राम हेरोइन व 315 बोर के तीन कारतूस बरामद हुए। जबकि कयास लगाए जा रहे थे कि भारी मात्रा में युवक हेरोइन की खेप ले जा रहे हैं।
मुखबिर की यह भी सूचना थी कि दोनों युवकों के पास अवैध असलाह भी हैं। कार से सामान बरामद होने के बाद भी शुक्रवार और शनिवार को एसटीएफ मोहाली व जिला पुलिस संयुक्त रूप से उस रास्ते को खंगालती रही, जहां से गुरचेत गाड़ी भगाकर कोटइसे खां गया था, ताकि पुलिस को हेरोइन या फिर अन्य नशे का कोई पैकेट बरामद हो जाए।