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पंजाब में पटवारियों का कारनामा, दफ्तरों में अपने खर्च से रख लिए निजी कर्मचारी, अब सूची हुई तैयार

Thu, 04 Jul 2019 03:54 AM IST
ajay kumar हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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पटवारियों द्वारा रिश्वतखोरी के मामले तो सामने आते रहे हैं लेकिन भ्रष्टाचार के एक नए तरीके के खुलासे ने सरकार को भी चौंका दिया है। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने जांच के आधार पर ऐसे 100 पटवारियों की सूची सरकार को सौंपी है, जिन्होंने अपने दफ्तरों में प्राइवेट कर्मचारियों को नियुक्त कर रखा है।

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इन निजी मुलाजिमों को वेतन पटवारी अपनी जेब से देते हैं और इनका काम सरकारी कागजात तैयार करने के साथ-साथ संबंधित पटवारी के लिए लोगों से रिश्वत की रकम बटोरना भी है।

पंजाब सरकार के चौकसी विभाग ने विजिलेंस की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित विभाग प्रमुखों को कई बार पत्र लिखकर जवाबतलबी की लेकिन हैरानी की बात यह है कि संबंधित विभाग प्रमुखों ने सरकार को जवाब देना भी जरूरी नहीं समझा।
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चौकसी विभाग की ओर से अब 29 जून को सभी डीसी को पत्र लिखकर विजिलेंस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने को कहा गया है, जिस पर सभी डीसी ने जिला राजस्व अधिकारियों (डीआरओ) को संबंधित एसडीएम से जवाब हासिल करने का जिम्मा सौंपा। लेकिन किसी भी एसडीएम की ओर से अब तक इस सिलसिले में कोई जवाब नहीं दिया गया है।

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जिला राजस्व अधिकारियों द्वारा भेजे अंतिम पत्र में सरकार की तरफ से यह चेतावनी भी दी गई है कि अगर पत्र का जवाब नहीं दिया जाता और इसे लेकर राज्य सरकार को कार्रवाई करती है तो संबंधित अधिकारी उसके लिए निजी तौर पर जिम्मेदार होगा। विजिलेंस सूची में एसएएस नगर, जालंधर, होशियारपुर, मोगा, पटियाला, बरनाला, फरीदकोट, संगरूर समेत कई जिलों के पटवारियों और उनके निजी कर्मचारियों के नाम शामिल हैं।

पटवारियों के साथ प्राइवेट कर्मियों के नाम भी दिए  
उल्लेखनीय है कि विजिलेंस विभाग ने पटवारियों की जो सूची राज्य सरकार को सौंपी है, उनमें पटवारी का नाम और उसके द्वारा अपने साथ लगाए गए प्राइवेट कर्मचारी का नाम भी दिया गया है। इस सूची में कई जिलों में 5-10 पटवारियों के नाम शामिल हैं, जिन्होंने अपने लिए निजी कर्मचारी रखे हैं।

 विजिलेंस की ओर से सरकार को सूची सौंपते हुए ऐसे पटवारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश भी की गई है लेकिन सरकार संबंधित विभाग प्रमुखों की मिलीभगत के चलते दोषियों के खिलाफ जांच को एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा सकी है।

 इस संबंध में राजस्व एवं पुनर्वास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस बार चेतावनी के साथ पत्र भेजे हैं। अगर विभाग प्रमुखों ने जांच में सहयोग नहीं किया तो उनके खिलाफ भी सरकार को कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।
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