ये बोले हुड्डा
शराब घोटाले में एक आरोपी के जमानत के लिए कोर्ट चले जाने से चर्चा नहीं रोकी जा सकती। जब प्रस्ताव सदन पटल पर आ गया तो उसे पढ़ने दें, सरकार जवाब देने से इन्कार कर दे। डिप्टी स्पीकर की जगह स्पीकर होते तो वह प्रस्ताव को सदन पटल पर रखते ही नहीं। स्पीकर को अपने आसन और कोर्ट दोनों की मर्यादा रखनी चाहिए।
कादियान बोले- सरकार के दबाव में स्पीकर
कांग्रेस विधायक रघुवीर कादियान ने कहा कि प्रस्ताव नामंजूर करने को लेकर स्पीकर साहब आप सरकार के दबाव में हो। दाल में कुछ काला नजर आ रहा है। सरकार के लोग शराब घोटाले में संलिप्त हैं, इसलिए चर्चा नहीं कराई जा रही। लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है।
क्या सोए रहे अधिकारी: अभय चौटाला
अभय चौटाला ने कहा कि कोर्ट आर्डर 22 दिसंबर का है, 28 दिसंबर को प्रस्ताव विधानसभा में चर्चा के लिए लाया गया। इतने दिन अधिकारी क्या सोए रहे। उन्होंने विधानसभा को समय पर जानकारी क्यों नहीं दी। सदन की कार्यवाही अलोकतांत्रिक तरीके से चलाई जा रही है। शराब घोटाले में सरकार चर्चा नहीं चाहती, क्योंकि इसमें उसके अधिकारियों और मंत्रियों की संलिप्तता सामने आती। सरकार गन्ने का दाम बढ़ाकर 426 रुपये प्रति क्विंटल करे।
विपक्ष को दिखास की बीमारी लग गई: मनोहर लाल
शराब घोटाले का प्रस्ताव पेश करने की मांग के दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल सदन में नहीं थे। जैसे ही वह पहुंचे उन्हें डिप्टी सीएम से पूरा मामला जाना। इसके बाद वह थोड़ी देर शांत रहे लेकिन हुड्डा व विपक्षी विधायक जब बार-बार प्रस्ताव पढ़ने का मुद्दा उठाते रहे तो सीएम ने कहा कि विपक्ष को दिखास की बीमारी लग गई है। इन्हें अहम मुद्दों पर चर्चा नहीं करनी, सिर्फ लोगों को दिखाना है। एक दिन में दो प्रस्ताव पर ही चर्चा हो सकती है, 37-37 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा नहीं करा सकते।