गेट पास, मैसेज समेत तमाम सरकारी झंझटों से बचते हुए किसान अपनी सरसों की फसल मंडी में न बेचकर बाहर प्राइवेट एजेंसियों को बेच रहे हैं। भिवानी में औसतन रोजाना 400 किसान सरसों की फसल लेकर पहुंच रहे हैं, अधिक दाम मिलने के कारण बाहर अपनी फसल बेच रहे हैं। फतेहाबाद में अभी गेहूं आना शुरू नहीं हुआ है। 10 हजार क्विंटल सरसों पहुंची है। सरकार ने सरसों पर एमएसपी 4650 रुपये प्रति क्विंटल है, बाहर 5 हजार से अधिक भाव मिल रहा है।
बंद हो मैसेज सिस्टम : मान
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान का कहना है कि मैसेज सिस्टम गलत है, इसे तुरंत प्रभाव से बंद किया जाना चाहिए। जिन लोगों ने योजना लागू की है, उन्हें न तो खेती का ज्ञान है और न ही मंडी का। अगर किसान के पास इतनी मैनेजमेंट और इतने साधन होते कि वह फसल कटवाने के बाद फसल को कई दिन अपने घर रख ले तो वह आज किसान नहीं, बल्कि व्यापारी होता। कंबाइन मिलना, मौसम और फिर ट्रैक्टर-ट्रॉली से फसल मंडी में पहुंचाना एसएमएस के हिसाब से नहीं हो सकता। जो किसान मंडियों में फसल लेकर आ रहा है, उसकी खरीद की जाए।
अभी खरीद की शुरुआत ही हुई है और गेहूं की आमद कम है। बारदाने की अगर दिक्कत है तो उसे दूर कर लिया जाएगा। एसएमएस की जहां तक बात है किसान अब पोर्टल पर जाकर खुद अपनी फसल के लिए शेड्यूल तय कर सकेंगे। - अनुराग रस्तोगी, एसीएस, फूड एंड सप्लाई विभाग के एसीएस