बात करने को कोई नहीं मिला तो मिलाया हेल्पलाइन नंबर
सेक्टर-22 निवासी एक बुजुर्ग ने फोन कर वृद्धावस्था से जुड़ी सारी योजनाओं, पेंशन के बारे में पूछा और अंत में बताया कि उनकी कोई समस्या नहीं है, उन्होंने तो बस यूं ही मन किया तो फोन कर लिया था। कर्मचारियों ने बताया कि रोजमर्रा की बातें करने के लिए भी बुजुर्गों के पास कोई नहीं है। प्रतिदिन ऐसे कई फोन आते हैं।
बेटा बहुत दिनों से नहीं बनवा रहा चश्मा
सेक्टर-15 निवासी एक वृद्ध की ओर से हेल्पलाइन नंबर पर फरियाद की गई कि उनका बेटा बहुत दिनों से उनका चश्मा नहीं बनवा रहा है। क्या आप मेरा चश्मा बनवा सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि घर के सदस्य बुजुर्गों को समय नहीं देते, इस कारण उन्हें हेल्पलाइन नंबर पर ही बात करनी पड़ती है।
फोन कर छह माह बाद घर पहुंची राजवंती
मानसिक तनाव से गुजर रहीं 67 वर्षीय राजवंती को घर का रास्ता भूलने की वजह से छह माह तक सड़कों पर ठोकरें खानी पड़ीं। 12 जनवरी से परिवार की ओर से तलाश शुरू की गई लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। राजवंती ने किसी से पूछकर वरिष्ठ नागरिक हेल्पलाइन पर फोन किया जिसके बाद विभाग की मदद से वह परिवार से मिल पाईं।
तसबीर कौर, उम्र 75 वर्ष
सेक्टर-15 स्थित वृद्ध आश्रम में रह रहीं तसबीर कौर की आंखें नम हो आईं, जब उनसे उनके परिवार के बारे में पूछा गया। तसबीर ने बताया ‘यहां हम सभी प्रेम से रहते हैं, किसी चीज की कमी नहीं पर बच्चों की याद आती है तो दिल भर आता है।’ एक साल से वृद्धाश्रम में रह रही तसबीर कौर के दोनों बच्चे जब उनकी देखभाल करने से मुकर गए तो उनके देवर-देवरानी उन्हें वृद्धाश्रम छोड़ आए।
वरिष्ठ नागरिक हेल्पलाइन की सबसे अच्छी बात यह है कि जो भी बुजुर्ग फोन करते हैं, उनका एक डाटा तैयार किया जा रहा है। जो समस्या वह बताते हैं, उसे संबंधित विभाग को भेजने के बाद 24 घंटे के अंदर बुजुर्ग को जानकारी भी दी जाती है। हर कॉल रिकॉर्ड की जाती है ताकि अधिकारी उसे चेक कर सकें। ये बुजुर्गों के लिए एक वन प्वाइंट सेंटर के तौर पर बखूबी काम कर रहा है। -नीतिका पवार, सचिव, समाज कल्याण विभाग
सामाजिक सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत
पहले पूरा गांव एक परिवार के रूप में रहता था लेकिन शहरीकरण में लोगों का सामुदायिक जीवन समाप्त होता जा रहा है। बाजारीकरण और व्यक्तिवाद के चलते संयुक्त परिवार की जगह एकल परिवार ने ले ली है। आने वाले समय में यह समस्या और अधिक बढ़ने वाली है। इससे बचाव के लिए आवश्यक है कि प्रशासन बुजुर्गों की सामाजिक सुरक्षा को बढ़ाए और लोग अपनों की अहमियत को समझें। - डॉ. मंजीत, समाजशास्त्री।