शुगरफेड की ओर से गन्ना किसानों को हर तरह की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए किसान एप तैयार कराया गया है। इस एप में ई-पर्ची से लेकर गन्ना लाने की तिथि और समय भी लिखा होता है। इसके अलावा, किसान ये भी चेक कर सकते हैं कि मिल में कितनी ट्रैक्टर ट्राली लाइन में खड़ी हैं और उनका नंबर किस समय आएगा।
दूसरा, अगर मिल में कोई खराबी आती है या ब्रेकडाउन होता है भी यहां पर अपडेट किया जाता है। ऐसे में अगर गन्ना उत्पादक इस एप को डाउनलोड करते हैं, उनकी कई समस्याओं का समाधान हो जाता है। एक अन्य फीचर है कि जैसे ही किसान का गन्ना तोला जाता है तो उसका वजन किसान के मोबाइल पर मैसेज से आ जाता है, जब खाली ट्राली का वजन होता है तो वह भी मोबाइल पर अपडेट हो जाता है। इसमें गड़बड़ी की आशंका कम होती है।
मैनुअली सिस्टम में गड़बड़ी की आशंका ज्यादा
मैनुअली सिस्टम में गड़बड़ी की आशंका ज्यादा रहती है। सबसे बड़ा खेल तो पर्ची को लेकर होता है और उसके बाद तौल में भी गड़बड़ी के आरोप लगते रहे हैं। पहले जानकार या फिर रसूखदार किसानों को पहले और ज्यादा गन्ना पर्ची दिए जाने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में आम किसान को पर्ची के लिए मिल अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते थे। इतना ही नहीं मिल कर्मी गांवों में किसी एक व्यक्ति के घर पर सभी किसानों की पर्चियां भेज देते हैं, इससे कई बार किसानों की पर्ची गुम हो जाती है या फिर उसे समय पर मिल नहीं पाती है।
किसान खुद कर सकेंगे सर्वे
शुगरफेड ने एक और अहम फैसला यह लिया है कि किसान अपने गन्ने की फसल का खुद सर्वे कर सकेंगे। जिन किसानों ने एप डाउनलोड किया है वे अगले सीजन से जीपीएस के माध्यम से खुद अपने खेत और फसल का सर्वे कर उस पर डाल सकते हैं। बता दें कि इस समय किसान पहले बांड भरता है और बाद में मिल फिजिकली सर्वे कराता है कि किसान के पास कितने एकड़ में फसल है।
मैनुअल पर्ची सिस्टम में कागज और समय ज्यादा लगता है। इसलिए इस बार शुगरफेड ने ई-पर्ची से गन्ना खरीद का फैसला लिया है। किसान एप के माध्यम से भी किसान इसका लाभ उठा सकते हैं। इसमें कई सुविधाएं दी गई हैं। डिजिटल व्यवस्था में पारदर्शिता ज्यादा है और किसान घर से चलने से पहले सारी जानकारी ले सकता है। कैप्टन शक्ति सिंह, एमडी, शुगरफेड।