वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी लागू करते समय तय हुआ था कि राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई केंद्र करेगा। पंजाब को 23 फीसदी राजस्व फसल खरीद पर वैट के रूप में आता था, लेकिन जीएसटी के चलते यह वैट हटा दिया गया। पहले तो जीएसटी का स्टेट शेयर प्रति माह आता था, लेकिन बाद में केंद्र ने इस अदायगी को प्रत्येक दो माह पर कर दिया।
अब तीन माह बीत चुके हैं और केंद्र ने राज्य सरकार का बकाया नहीं दिया है। वित्त मंत्री ने कहा कि मुख्य मुद्दा बकाया 4100 करोड़ रुपये का है और यह रकम मामूली नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान में यह साफ किया गया है कि राज्यों को टैक्स में नुकसान की भरपाई केंद्र सरकार को करनी होगी।
कैप्टन को चिट्ठी नहीं, इंटरनल नोट भेजा था
वित्त मंत्री ने इस बात से इनकार किया कि वित्तीय हालात के बारे में उन्होंने विदेश दौरे पर गए मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को पत्र लिखा था। उन्होंने कहा कि यह एक इंटरनल नोट था, जिसमें कहा गया था कि अगर केंद्र सरकार बकाया 4100 करोड़ रुपये का राज्य को भुगतान नहीं करती तो हमारे पर प्लान-बी क्या होगा? क्या इस राशि के बिना राज्य का गुजारा चल सकेगा?
यह हो सकता है सरकार का प्लान बी
वित्त मंत्री ने कहा कि प्लान-बी के तहत राज्य सरकार विभिन्न तरीकों से राजस्व जुटाने के उपाय खोज सकती है, जिसमें, कंपनियों से टैक्स की एडवांस वसूली, विभिन्न उपक्रमों और सेवाओं पर एरियर, नये साधनों की खोज आदि पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सोमवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में विचार किया जाएगा।