राज्यसभा की दोनों सीटों पर भाजपा की जीत के साथ ही हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर अपने पहले पॉलिटिकल टेस्ट में पास हो गए हैं।
जाट आरक्षण आंदोलन के बाद से खट्टर न केवल विपक्ष के निशाने पर थे, बल्कि प्रदेश भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी भी झेल रहे थे। सुभाष चंद्रा को राज्यसभा तक पहुंचाने का करिश्मा कर दिखाने के बाद मुख्यमंत्री की हैसियत आलाकमान के सामने और बढ़ गई है। लिहाजा, आज इलाहाबाद में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में खट्टर पूरे आत्मविश्वास के साथ पहुंचेंगे।
बीरेंद्र सिंह अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे। लिहाजा, केंद्र के नेताओं की नजरें भी हरियाणा की दूसरी राज्यसभा सीट पर टिकी थीं। बीते कल तक सुभाष चंद्रा की जीत पर संकट के बादल मंडरा रहे थे, लेकिन मुख्यमंत्री की सधी हुई राजनीतिक चाल ने पूरी बाजी पलट दी। देर रात तक राज्यसभा की दूसरी सीट के लिए जोड़-तोड़ चलती रही। जिसके बाद मनोहर लाल ने सुबह मीडिया में बयान दिया कि दोनों सीटें भाजपा की झोली में आएंगी।
विजय दिलाने में विजयवर्गीय का भी योगदान
हरियाणा विधानसभा चुनाव में प्रभारी रहे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी मुख्यमंत्री की रणनीति में बड़े सहायक के तौर पर सामने आए हैं। भाजपा के खाते में दोनों राज्यसभा सीटें आने के बाद विजयवर्गीय ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि उनकी और खट्टर की जुगलबंदी ही हरियाणा में भाजपा को जीत दिलवा सकती है।