वहीं, हरियाणवी कलाकार सतीश बहलबा ने वार्ड 13 से 5 हजार 454 वोटों से जीत हासिल की थी। सोनीपत रोड स्थित भालौठ गांव निवासी सीमा ने वार्ड सात से विजयी रही थी। भालौठ गांव का जिला परिषद से गहरा नाता रहा है। हुड्डा राज में जहां राजेश भालौठ जिला परिषद के चेयरमैन रहे। वहीं भाजपा राज में बलराज कुंडू के बाद 2020 में सतीश भालौठ चेयरमैन बने। अब सीमा चेयरमैन की दावेदार है। इसके अलावा जिला परिषद के वार्ड नंबर चार में रोचक मुकाबला हुआ था।
पूर्व मंत्री कृष्णमूर्ति हुड्डा व पूर्व विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा के गांव खिड़वाली से सात प्रत्याशी वार्ड से चुनाव लड़ रहे थे। जबकि जीत घुसकानी गांव के अनिल कुमार को मिली थी। अनिल ने 204 वोटों के अंतर से खिड़वाली के रामकरण उर्फ धोबा को हराया था। गांव के पूर्व सरपंच व जाट आंदोलन में सक्रिय रहे ओमप्रकाश हुड्डा तीसरे स्थान पर रहे थे।
वहीं, वार्ड नंबर 12 से भारतीय आशा पार्टी ने सुमन गिरावड़, आप ने बहुअकबरपुर की किदवंती देवी व भाजपा नेता ने अपनी पुत्रवधु को मैदान में उतारा था। सुमन गिरावड़ को भारतीय आशा पार्टी का चुनाव चिन्ह नहीं मिला। ऐसे में उसने निर्दलीय ही चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। सुमन ने आम आदमी पार्टी की किदवंती को 517 वोटों से हराया था। वह चेयरमैन की भी दावेदार मानी जा रही थी।
मंजू हुड्डा के खिलाफ नहीं आया एक भी नामांकन
जिला विकास भवन में ठीक 11 बजे एडीसी महेंद्रपाल की अध्यक्षता में बैठक शुरू हुई। मंजू ने चेयरमैन पद के लिए नामांकन दिया, उनके खिलाफ किसी भी पार्षद ने नामांकन दाखिल नहीं किया। एडीसी ने पांच मिनट में मंजू को विजेता घोषित कर दिया।
अनिल हुड्डा को मिले 14 में से 10 वोट
मीटिंग में वार्ड नंबर 4 से पार्षद अनिल हुड्डा ने सर्वसम्मति बनाने का प्रयास किया लेकिन वार्ड नंबर वार्ड नंबर तीन से पार्षद मांगेराम चिड़ी व वार्ड 11 से दीपिका ने चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। ईवीएम से मतदान कराया गया। अनिल को 10, मांगेराम को 3 व दीपिका को एक वोट मिला। अनिल को विजेता घोषित कर दिया गया।